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गुप्त नवरात्रि 2020: इस तारीख से शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि, 9 दिनों तक होगी देवी दुर्गा की उपासना

By मेघना वर्मा | Updated: May 25, 2020 11:16 IST

आदि शक्ति मां भगवती की उपासना के लिए चार नवरात्रि आती है। आषाढ़ और माघ की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के नाम से जानी जाती है।

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ठळक मुद्देगुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना होती है।गुप्त नवरात्रि में भी उदय नवरात्रि की ही तरह ही कलश की स्थापना की जाती है।

हिन्दू धर्म में मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। देवी दुर्गा को पूजने के लिए लोग साल में चार बार नवरात्रि मनाते हैं। इन चार नवरात्रियों में दो नवरात्रि उदय नवरात्रि होती है जबकि दो गुप्त नवरात्रि होती है। उत्तर भारत के ज्यादातर जगहों पर मनाई जाती है। 

आदि शक्ति मां भगवती की उपासना के लिए चार नवरात्रि आती है। आषाढ़ और माघ की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के नाम से जानी जाती है। गुप्त नवरात्रि में भी 9 दिनों तक आदि शक्ति देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। इस बार आषाढ़ में फिर से नवरात्रि पड़ने वाली है। आइए आपको बताते हैं कब है गुप्त नवरात्रि-

कब है गुप्त नवरात्रि

इस साल आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि 22 जून से शुरू हो रही है। जो 30 जून तक चलेगी। 30 जून को ही नवरात्रि का पारण होगा। 22 जून दिन सोमवार से शुरू होने वाली इस गुप्त नवरात्रि के नौ दिन देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा होती है।

क्या होती है गुप्त नवरात्रि

गुप्त नवरात्रि की पूजा मां दुर्गा की उपासना के साथ तंत्र साधना के लिए भी जानी जाती है। इस गुप्त नवरात्रि में भी लोग व्रत-पूजा, उपवास आदि करते हैं। लोग इसमें दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ लाभकारी माना जाता है। 

गुप्त नवरात्रि का भी है विशेष महत्व

साल के दो प्रमुख नवरात्रि में जिस प्रकार देवी के नौ रूपों की पूजा होती है। उसी तरह गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना होती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

10 महाविद्याओं की होती है साधना

गुप्त नवरात्रि में भी उदय नवरात्रि की ही तरह ही कलश की स्थापना की जाती है। नौ दिन तक व्रत का संकल्प लेकर प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा की अराधना इस दौरान की जाती है। साथ ही अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत की समाप्ति होती है। तंत्र साधना करने वाले इस दौरान माता के 10 महाविद्याओं की साधना करते हैं।

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