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Ganesh Chaturthi 2019: गणपति का पेट या कुबेर का धन, कौन बड़ा है?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: September 2, 2019 08:41 IST

Ganesh Chaturthi: भगवान गणेश से जुड़ी कई कहानियां प्रचलित हैं जो हमें सीख देती हैं। इनमें से ही एक कहानी वह भी है जब वह कुबेर के घर भोजन के लिए गये।

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ठळक मुद्देगणेश चतुर्थी के मौके पर जानिए भगवान गणेश और कुबरे से जुड़ी दिलचस्प कहानीकुबेर को अपनी धन-संपत्ति का बहुत घमंड था लेकिन गणेश जी ने उसे बहुत आसानी से तोड़ दिया

गणपति के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से एक वह कथा है जिसमें वह कुबेर के यहां भोजन पर गये। कुबेर यक्षों के राजा थे। कुबेर धन के स्वामी हैं। कुबेर का शरीर थोड़ा सा विकृत था। वे हर समय तमाम हीरे जवाहरात से लदे रहते थे जिससे उसकी आकृति छिप जाती थी। वे चाहते थे कि शिव भी इसी तरह खूब हीरे जवाहरात पहनें। कुबेर हर रोज नए आभूषण के साथ शिव के पास आते और उनसे कहते, 'आपको इसे पहनना चाहिए।'

शिव इस पर कहते, 'मैं तो बस भस्म ही लगाता हूं। मुझे किसी आभूषण की आवश्यकता नहीं है।' कुबेर ने पर हार नहीं मानी। एक दिन शिव ने कहा, 'अगर तुम वास्तव में मेरे लिए कुछ करना चाहते हो तो मेरे बेटे के लिए करो।'

शिव ने गणेश की ओर इशारा किया और कहा, 'यह मेरा बेटा है। इसे भोजन पसंद है। इसे घर ले जाओ और भरपेट खाना खिलाओ जिससे उसे संतुष्टि हो जाए।' जैसे ही भोजन का जिक्र आया, गणेश उठ खड़े हुए और बोले, 'हां, हां, कहां, कब?' कुबेर ने गणपति को घर आने का न्योता दिया और गणपति उनके यहां जा पहुंचे।

Ganesh Chaturthi: गणपति पहुंचे कुबेर के घर

कुबेर को अपनी घन दौलत और महल का बड़ा घमंड था। गणपति ने गंदे पैरों से ही महल के अंदर प्रवेश किया। इसके कारण उनके पैरों के निशान महल के शानदार संगमरमर के फर्श पर छप गये। नौकर-चाकर गणेश के पीछे उन निशानों को पोंछते हुए आ रहे थे। कुबेर ने सोचा, 'आखिर शिव का बेटा है चलो, कोई बात नहीं।' खैर गणपति महल के अंदर आए और आसन जमा लिया। उन्हें भोजन परोसा गया। गणपति ने भोजन करना शुरू कर दिया। खाना बार-बार बनाया जाता और गणपति उसे खत्म कर जाते।

इस बर कुबेर ने कहा, 'तुम छोटे बच्चे हो। उस हिसाब से तुमने बहुत ज्यादा खा लिया है। इतना भोजन तुम्हारे लिए नुकसानयदायक हो सकता है।'

गणपति ने कहा, 'खतरे की कोई बात नहीं है। मेरी चिंता मत कीजिए। मुझे अभी भी तेज भूख लगी है। आप खाना मंगवाइए। आखिर अपने मेरे पिता को वचन दिया है कि आप मुझे भरपेट खाना खिलाएंगे।' कुबेर का पूरा खजाना खाली हो गया। सब कुछ बेचकर भोजन की व्यवस्था की गई। फिर भी गणपति का पेट नहीं भरा।

Ganesh Chaturthi: ऐसे विद्वान जिन्हें भोजन प्रिय है

गणपति की थाली खाली थी, लेकिन अभी भी वह मिठाइयों का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'खीर कहां है, लड्डू कहां हैं?' कुबेर बोले, 'मुझसे गलती हो गई। घमंड में आकर मैंने अपनी संपत्ति की डींगें मार दी। मैं यह जानता हूं कि मेरे पास जो भी है वह सब शिव का ही दिया हुआ है। फिर भी एक मूर्ख की भांति यह सोचकर मैं उन्हें वे तुच्छ आभूषण भेंट करने की कोशिश करता रहा कि मैं उनका परम भक्त हूं।'

इसके बाद कुबेर वहीं गणपति के पैरों में गिर गये और क्षमा याचना करने लगे। इसके बाद गणपति मुस्कुराते हुए बिना मिठाई खाए ही वहां से चल दिए।

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