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Dussehra 2020 Puja Shubh Muhurat: कब है अभिजित मुहूर्त, विजय मुहूर्त, अमृत काल मुहूर्त

By गुणातीत ओझा | Updated: October 25, 2020 12:41 IST

आज बुराइयों पर अच्छाई की सबसे बड़ी जीता का पर्व दशहरा धूम-धाम से मनाया जा रहा है। पूरे देश में विजयादशमी को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।

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ठळक मुद्देआज के दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। आज ही के दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध भी किया था।

Dussehra 2020: आज बुराइयों पर अच्छाई की सबसे बड़ी जीता का पर्व दशहरा धूम-धाम से मनाया जा रहा है। पूरे देश में विजयादशमी को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। आज के दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। आज ही के दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध भी किया था। आइये आपको बताते हैं आज के दिन से जुड़े पूजा आयोजनों और शुभ मुहूर्त के बारे में..

दशहरा पर किया जाता है शस्त्र पूजनदशहरा के दिन शस्त्र पूजन करने की परंपरा सदियों पुरानी है। आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी को शस्त्र पूजन का किया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के पूजन के बाद दशहरे का त्योहार मनाया जाता है। विजयदशमी पर मां दुर्गा का पूजन किया जाता है। मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं। भारत की रियासतों में शस्त्र पूजन धूम-धाम से मनाया जाता था। अब रियासतें तो नही रहीं  लेकिन परंपराएं शाश्वत हैं। यही कारण है कि इस दिन आत्मरक्षार्थ रखे जाने वाले शस्त्रों की भी  पूजा की जाती है। हथियारों की साफ-सफाई की जाती है और उनका पूजन होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए जाने वाले कामों का शुभ फल अवश्य प्राप्त होता है। यह भी कहा जाता है कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इस दिन शस्त्र पूजा करनी चाहिए। 

नीलकंठ का दिखना क्यों शुभ है?ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि जब श्रीराम रावण का वध करने जा रहे थे। उसी दौरान उन्हें नीलकंठ के दर्शन हुए थे। इसके बाद श्रीराम को रावण पर विजय मिली थी।  यही वजह है कि नीलकंठ का दिखना शुभ माना गया है। इस दिन सभी अपने शस्त्रों का पूजन करते है। सबसे पहले शस्त्रों के ऊपर जल छिड़क कर पवित्र किया जाता है फिर महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शस्त्रों पर कुंकुम, हल्दी का तिलक लगाकर हार पुष्पों से श्रृंगार कर धूप-दीप कर मीठा भोग लगाया जाता है। शाम को रावण के पुतले का दहन कर विजया दशमी का पर्व मनाया जाता है। इसी तरह की कई और बातें हैं जो  दशहरा के दिन की जाती है। इनमें से एक है, आज के दिन पान का बीड़ा हनुमानजी के चढ़ाना और उसके बाद इसे खाना। पान हनुमाजी को बहुत पसंद है और इस बार दशहरा मंगलवार को पड़ रहा है इसलिए यह दिन और भी खास हो जाता है।

रावण दहन पर कोरोना का असरज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि पिछले 68 वर्षों में यह पहला मौका है, जब देश के कई शहरों में दशहरा उत्सव का आयोजन नहीं होगा। यह दशहरा पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता था। एक भी वर्ष ऐसा नहीं गया, जब यह आयोजन नहीं हुआ है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते न तो रामलीला का आयोजन हो रहा है और न ही दशहरे का आयोजन हो रहा है। यह कोरोना का ही असर है कि रावण की ऊंचाई इस बार घट गई है। दरअसल, नवरात्र के पहले दिन से ही दशहरे के लिए रावण दहन की तैयारियां की जाने लगी हैं। जहां कोरोना संक्रमण के कारण इस साल रावण का आकार छोटा रहेगा। रावण का पुतला अमूमन 35 फीट ऊंचा रहता था लेकिन इस वर्ष कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए पुतले की ऊंचाई 15 फीट रखी गई है। दशहरा उत्सव भी छोटे रूप में ही मनाया जाएगा।

दशहरा का शुभ मुहूर्त (Dussehra Puja Shubh Muhurat)विजयादशमी (Vijayadashami)दशमी तिथि प्रारंभ - 25 अक्टूबर को सुबह 7 : 41 मिनट से दशमी तिथि समाप्त - 26 अक्टूबर को सुबह 8 : 59 मिनट तक रहेगीविजय मुहूर्त (Vijay Muhuarat) दोपहर  2:05 मिनट से 2:52 मिनट तक पूजा का समयदोपहर 01:11 मिनट से 03 :24 मिनट तक 

रावण दहन शुभ मुहूर्त (Ravan Dahan Shubh Muhurat)अभिजित मुहूर्त- सुबह 11: 43 मिनट से दोपहर 12 : 30 मिनट तक।विजय मुहूर्त- दोपहर 2 : 05 मिनट से दोपहर 2 : 52 मिनट तक।अमृत काल मुहूर्त- शाम 6 : 44 मिनट से रात 8 : 27 मिनट तक।

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