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आज लगने वाला ग्रहण है पेनुम्ब्रल चंद्रग्रहण, जानिए क्या होता है इसमें खास

By मेघना वर्मा | Updated: June 5, 2020 09:08 IST

धार्मिक विषयों से जुड़े जानकारों के अनुसार 5 जून को लगने वाला ग्रहण मात्र उपच्छाया चंद्र ग्रहण है।

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ठळक मुद्देग्रहण को आस्था की नजर से देखा जाता है। चंद्रग्रहण तीन प्रकार के होते हैं- फुल, आंशिक और पेनुम्ब्रल।

कुछ ही घंटों बाद साल दूसरा चंद्रग्रहण लगने वाला है। ज्योतिष शास्त्र में इसे एक अशुभ घटना बताई जाती है। ये चंद्र ग्रहण रात 11 बजकर 15 मिनट से शुरू होगा जो 6 तारीख को 2 बजकर 34 मिनट (सुबह) तक रहेगा। इस ग्रहण को हम अपनी नंगी आंखों से देख नहीं पाएंगे। रात 12 बजकर 54 मिनट पर यह अपनी पूर्ण स्थिति में होगा। इस चंद्रग्रहण की कुल अवधि 3 धंटे 15 मिनट की होगी। 

आज (5 जून) लगने वाला चंद्रग्रहण पेनुम्ब्रल चंद्रग्रहण होगा। आइए आपको बताते हैं क्या होता है पेनुम्ब्रल ग्रहण-

क्या होता है पेनुम्ब्रल चंद्रग्रहण

चंद्रग्रहण तीन प्रकार के होते हैं- फुल, आंशिक और पेनुम्ब्रल। चंद्रग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य की कुछ रोशनी को सीधे चंद्रमा तक पहुंचने से रोकती है और पृथ्वी की छाया के बाहरी हिस्से को, जिसे पेनम्ब्रा कहा जाता है, चंद्रमा का सभी भाग कवर करता है। पृथ्वी की छाया के डार्क कोर की तुलना में पेनु्म्ब्रा थोड़ा हल्का डार्क होता है, इसलिए इस ग्रहण को देखना थोड़ा मुश्किल है। कभी-कभी पेनुम्ब्रल ग्रहण को लोग पूर्ण चंद्रग्रहण भी कहते हैं। 

जून 2020 का चंद्रग्रहण कब और कहां दिखेगा?

पेनुम्ब्रल चंद्रग्रहण 5 जून को रात 11:15 बजे शुरू होगा और 6 जून को सुबह 2:34 बजे तक चलेगा, जो लगभग तीन घंटे और 18 मिनट का है। यह पूर्वी अफ्रीका, मध्य पूर्व, दक्षिणी एशिया सहित भारत और ऑस्ट्रेलिया से दिखाई देगा। नासा के आंकड़ों के अनुसार, यह ग्रहण दक्षिण अमेरिका, पश्चिमी अफ्रीका और यूरोप के पूर्वी तट पर रहने वाले लोगों को मूनराइज़ के समय दिखेगा और जापान और न्यूजीलैंड के लोगों को मूनसेट के समय दिखाई देगा।

ग्रहण को आस्था की नजर से देखा जाता है। ग्रहों की चाल और राशि बदलने का असर क्या पड़ेगा इस बात को भी देखा जाता है। ग्रहण का हमारे जीवन पर भी प्रभाव पड़ता है। इस साल पड़ने वाले ग्रहण की बात करें तो ये ग्रहण भारत समेत यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा।

धार्मिक विषयों से जुड़े जानकारों के अनुसार 5 जून को लगने वाला ग्रहण मात्र उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। कई जानकारों के अनुसार उपच्छाया चंद्र ग्रहण को शास्त्रों में ग्रहण की श्रेणी में नहीं रखा गया है। यही कारण है कि इस ग्रहण के दौरान सूतक नहीं लगेगा। आमतौर पर चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले और सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले से शुरू हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार ये ग्रहण नहीं है, इसलिए इसका खास प्रभाव भी नहीं पड़ेगा।

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