लाइव न्यूज़ :

Basant Panchami 2026 Date: बसंत पंचमी 2026 क्यों है खास? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त एवं धार्मिक महत्व

By रुस्तम राणा | Updated: January 8, 2026 14:23 IST

हिंदू मान्यता के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

Open in App

Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मां सरस्वती को समर्पित होता है, जिन्हें ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी से ही ऋतुओं के राजा बसंत का आगमन होता है, जिससे प्रकृति में नई ऊर्जा और उल्लास दिखाई देता है।

बसंत पंचमी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी, गुरुवार के दिन रात में 2 बजकर 29 मिनट से होगी और इसका समापन 23 जनवरी, शुक्रवार को रात में 1 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार, बसंत पंचमी 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी और इसी दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाएगी। 

सरस्वती पूजा 2026 शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने के लिए सुबह 9 बजकर 53 मिनट से लेकर 11 बजकर 13 मिनट तक का समय सबसे उत्तम रहेगा। लाभ चौघड़िया : 8 बजकर 33 मिनट से लेकर 9 बजकर 53 मिनट तक।अमृत चौघड़िया : 9 बजकर 53 मिनट से लेकर 11 बजकर 53 मिनट तक।

बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। विद्यार्थी इस दिन विद्या, बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं। कई स्थानों पर बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी बसंत पंचमी के दिन कराया जाता है।

पीले रंग का विशेष महत्व

बसंत पंचमी को पीले रंग का पर्व भी कहा जाता है। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है। लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं और केसरिया चावल, पीली खीर, बूंदी और हलवा जैसे व्यंजन बनाते हैं। खेतों में सरसों की पीली फसल लहलहाती दिखाई देती है, जो किसानों के लिए खुशहाली का संकेत होती है।

बसंत पंचमी और भारतीय संस्कृति

बसंत पंचमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। इस दिन से कई सांस्कृतिक गतिविधियों की शुरुआत होती है। संगीत, नृत्य और कला से जुड़े लोग इसे विशेष रूप से मनाते हैं। कई स्थानों पर कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

बसंत पंचमी 2026 क्यों है खास?

23 जनवरी, शुक्रवार के दिन यानी बसंत पंचमी पर चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होने जा रहा है। वहीं, चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग बन रहा है। ज्ञान के कारक गुरु की राशि में बैठकर चंद्रमा का गजकेसरी योग बनाना अत्यंत शुभ है। 

वर्तमान समय में जब शिक्षा और संस्कार दोनों पर चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब बसंत पंचमी हमें ज्ञान, विवेक और सृजनात्मकता की ओर लौटने का संदेश देती है। यह पर्व बच्चों और युवाओं को शिक्षा के महत्व से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

बसंत पंचमी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रकृति और सकारात्मकता का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि शिक्षा और संस्कार ही समाज की असली पूंजी हैं। मां सरस्वती की कृपा से जीवन में बुद्धि, विवेक और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

टॅग्स :बसंत पंचमीसरस्वती पूजाहिन्दू धर्महिंदू त्योहार
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठHanuman Jayanti Puja Muhurat 2026: नोट कर लें बजरंगबली की पूजा के ये 2 सबसे शुभ मुहूर्त, बरसेगी पवनपुत्र की कृपा

पूजा पाठHanuman Jayanti 2026: बिना तामझाम ऐसे करें बजरंगबली की पूजा, चमक जाएगी आपकी किस्मत

पूजा पाठHanuman Jayanti 2026: 1 या 2 अप्रैल, कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती? दूर करें अपना कन्फ्यूजन

कारोबारApril 2026 Festival List: बैसाखी से बिहू तक, अप्रैल 2026 में छुट्टियों का पिटारा, चेक करें त्योहारों की पूरी लिस्ट

पूजा पाठHappy Ram Navami 2026 Wishes: राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं, दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजें ये मैसेज

पूजा पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठGrah Gochar April 2026: अप्रैल में 4 राशिवालों के लिए बनेंगे कई राजयोग, ये ग्रह गोचर दे रहे हैं शुभ संकेत

पूजा पाठPanchang 03 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 03 April 2026: आज अवसर का लाभ उठाएंगे कर्क राशि के लोग, जानें अन्य सभी राशियों का भविष्य

पूजा पाठगुड फ्राइडे : क्रूस पर इंसानियत का देवता

पूजा पाठBaisakhi 2026: सिर्फ पंजाब ही क्यों? भारत के इन 5 शहरों में भी दिखती है बैसाखी की रौनक, चेक करें बेस्ट स्पॉट्स