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क्या कांग्रेस प्रियंका गांधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा पेश करेगी?

By शीलेष शर्मा | Updated: February 25, 2021 19:37 IST

प्रियंका गांधी ने कहा कि लोगों के मुद्दे उठाने की मेरी ज़िम्मेदारी है, यह मेरा कर्तव्य है। जनता की आवाज़ उठाना मेरा कर्तव्य है।

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ठळक मुद्देमैं पीछे नहीं हटूंगी, मैं लड़ती रहूंगी, मैंने किसी के साथ गद्दारी नहीं की, न ही करूंगी।प्रियंका ने प्रदेश भर में सीधा संवाद करने के लिये पहले ही यात्रायें शुरू कर दी हैं।अब वह लखनऊ में डेरा डालने जा रही हैं। 

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपनी खोई ज़मीन वापस पाने के लिये अभी से 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गयी है।

प्रियंका ने आज घोषणा पत्र तथा आउटरीच कमेटी की बैठक ली जो प्रदेश भर में लोगों से मिलकर उन मुद्दों को चिन्हित करेगी, जिनको घोषणा पत्र में शामिल किया जाना है। प्रियंका ने प्रदेश भर में सीधा संवाद करने के लिये पहले ही यात्रायें शुरू कर दी हैं और अब वह लखनऊ में डेरा डालने जा रही हैं। 

इसी तैयारी के बीच प्रदेश के तमाम बड़े नेता पार्टी नेतृत्व पर दवाब डाल रहे हैं कि कांग्रेस को अगर चुनाव जीतना है तो प्रियंका गाँधी को अभी से पार्टी के मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में घोषित करना होगा। प्रमोद तिवारी, सलमान ख़ुर्शीद, विवेक बंसल,अजय कुमार लल्लू। मोना मिश्रा जैसे नेताओं की दलील है कि प्रियंका के नाम पर पार्टी एकजुट होकर चुनावी रण में संघर्ष कर सकेगी। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व फ़िलहाल मुख्यमंत्री के चेहरे का खुलासा करने को तैयार नहीं है। 

प्रियंका गाँधी की सलाहकार समिति के सदस्य आचार्य प्रमोद कृष्णन ने बातचीत में कहा कि जब तक मुख्यमंत्री का चेहरा सामने नहीं होगा पार्टी अपनी ज़मीन मज़बूत नहीं कर सकती। उनका तर्क था कि योगी को शिकस्त देने के लिये किसी ब्राह्मण चेहरे को सामने रखने की आवश्यकता है ,जो नाम चर्चा में हैं उनमें प्रियंका के अलावा प्रमोद तिवारी ,जितिन प्रसाद ,प्रमोद कृष्णन के नाम बने हुए हैं। 

सूत्र बताते हैं कि 2022 के चुनाव हिन्दू -मुस्लिम के आधार पर होंगे जिसकी व्यूह रचना भाजपा पहले ही कर चुकी है ,वह ध्रुबीकरण के ज़रिये यह कार्ड खेलेगी। मायावती को साथ लेकर भाजपा नया चुनावी मोर्चा तैयार करा रही है जिसमें बसपा के अलावा असउद्दीन ओबेसी, अनु प्रिया पटेल राजभर और शिवपाल को साथ लाया जा रहा ताकि सपा और कांग्रेस के वोट बैंक को तोड़ा जा सके।

सपा यादव और मुस्लिम वोटों पर दांव लगायेगी। इधर आम आदमी पार्टी ने भी चुनाव में उतरने की घोषणा कर दी है। इन हालातों में कांग्रेस पिछड़ों ,जाटों ,मुस्लिमों और ब्राह्मणों पर दांव लगाने की रणनीति बना रही है। 

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