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आईपीएल में चीनी कंपनी से नाराज आरएसएस करेगा बहिष्कार

By नितिन अग्रवाल | Updated: August 4, 2020 06:41 IST

इंडियन प्रीमियर लीग में चाइनीज मोबाइल कंपनी की स्पॉन्सरशिप आयोजन जारी रखने का फैसला लिया गया है.

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ठळक मुद्देइस साल चीनी मोबाइल कंपनी विवो सहित सभी प्रायोजकों को बरकरार रखने का फैसला किया गया है टूर्नामेंट 19 सितंबर से 10 नवंबर तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में खेला जाएगा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आईपीएल में चाइनीज मोबाइल कंपनी की स्पांसरशिप जारी रखने के फैसले पर नाराजगी जताई है. संघ के सहयोगी संगठन स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि अगर आईपीएल ने चाइनीज मोबाइल कंपनी को अलग नहीं किया तो क्रिकेट के इस फटाफट संस्करण का बहिष्कार किया जाएगा और देश भर में आईपीएल के खिलाफ अभियान भी चलेगा. उन्होंने इसे चीन सेना के साथ संघर्ष में शहीद हुए सैनिकों का अपमान करार दिया है.

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन का कहना है कि चीन के हमले में 20 भारतीय सैनिकों के मारे जाने के बाद देश में चीनी कंपनियों के बहिष्कार का अभियान चल रहा है. पूरे देश की भावनाएं चीन के खिलाफ हैं. ऐसी स्थिति में आईपीएल के आयोजकों ने चीनी मोबाइल कंपनी को प्रायोजक बनाने का फैसला किया है. यह आईपीएल संचालकों की असंवेदनशीलता है.

महाजन ने लोकमत से कहा कि फैसले पर विचार नहीं हुआ तो फिर हमारे पास आईपीएल के बहिष्कार के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा. उन्होंने कहा कि आईपीएल एक व्यवसाय है. इसे चलाने वाले देश और इसकी सुरक्षा के प्रति असंवेदनशील हैं. पूरा देश और दुनिया चीनी कंपनियों और उसके सामान का बहिष्कार कर रही है लेकिन आईपीएल में उन्हें पनाह दी जा रही है. उन्हें समझना चाहिए कि न खेल न क्रिकेट देश से ऊपर कुछ नहीं हो सकता.

आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने चीन के सबसे जघन्य कृत्य से शहीद हुए सैनिकों के प्रति अपमान प्रकट किया है. महाजन ने कहा कि अपने बाजार को चीनी प्रभुत्व से मुक्त करने के लिए पूरा देश देश एकजुट है सरकार भी चाइनीज कंपनियों को बाहर करने को लेकर कदम उठा रही है. चीनी निवेश से लेकर चीनी कंपनियों को आधारभूत संरचना के निर्माण और टेलीकॉम सेक्टर से दूर रखने की कोशिशें की जा रही है. ऐसे में आईपीएल का यह कदम देश की मनोदशा पर चोट है, बल्कि यह देश की सुरक्षा और आर्थिक चिंताओं का भी अनदार है. उन्होंने आईपीएल आयोजकों से कहा कि वह चीनी मोबाइल कंपनी को प्रायोजक बनाने पर फिर से विचार करें.

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