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मध्य प्रदेश चुनाव: अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के निशाने पर है बीजेपी, कांग्रेस को लेकर दिख रहा है सॉफ्ट-कॉर्नर

By भाषा | Updated: October 23, 2018 14:13 IST

मध्य प्रदेश में सत्ता की बागडोर पारम्परिक तौर पर कांग्रेस या भाजपा के हाथों में ही रही है और सपा की गिनती "तीसरे ध्रुव" के सियासी दलों में होती है।

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं हो पाने और बुधनी सरीखी हाई-प्रोफाइल सीट के अपने घोषित उम्मीदवार के अचानक पाला बदल लेने के बावजूद समाजवादी पार्टी (सपा) कांग्रेस के प्रति नरमी दिखा रही है। सपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनकी पार्टी 28 नवम्बर को होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहती और भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के इरादे से 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है।

कांग्रेस हाथ बढ़ाती तो हो जाता सपा के साथ गठबंधन

सपा की प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष मूलचंद यादव ‘बंते’ ने यहां साक्षात्कार में "पीटीआई-भाषा" से कहा, "अगर कांग्रेस हमारे पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से उचित तरीके से चर्चा करती, तो मध्यप्रदेश में दोनों दलों का चुनाव पूर्व गठबंधन हो सकता था। बहरहाल, हमारा राज्य के आसन्न विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रति कोई बैर भाव नहीं है।" कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल होने वाले वरिष्ठ नेता ने कहा, "हम राज्य में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के कुख्यात घोटाले के लिये जिम्मेदार भाजपा के 15 वर्षीय कुशासन को खत्म करना चाहते हैं। हम कांग्रेस को चुनावी नुकसान पहुंचाना नहीं चाहते।" यादव ने बताया कि सपा प्रदेश की 50 विधानसभा सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना पर काम कर रही है। पार्टी ने इनमें से आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित भी कर दिये हैं। बाकी उम्मीदवार इस महीने के आखिर तक घोषित कर दिये जायेंगे।

सपा, बसपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बीच चुनावी सहमतिगौरतलब है कि सपा ने सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट से अपने युवा नेता अर्जुन आर्य को चुनावी टिकट दिया था। लेकिन आर्य सपा को बड़ा झटका देते हुए कांग्रेस में शामिल हो गये. बुधनी सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का विधानसभा क्षेत्र है और इसे भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है. आर्य के पाला बदलने के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा, "खुद आर्य ने अखिलेश यादव से मिलकर चुनावी टिकट मांगा था। ऐसे में उनका कांग्रेस का दामन थामना हमारी समझ से परे है। हालांकि, उनके सपा छोड़ने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम बुधनी से किसी दूसरे नेता का अपना उम्मीदवार बनायेंगे।" उन्होंने एक अन्य सवाल पर कहा, "अगर भाजपा या कांग्रेस का कोई असंतुष्ट नेता सपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है, तो हम योग्यता के आधार पर उसे ससम्मान अपना उम्मीदवार बनायेंगे।" यादव ने यह भी बताया कि सपा, बहुजन समाज पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बीच चुनावी सहमति बन गयी है कि तीनों दल राज्य की किसी भी विधानसभा सीट पर एक-दूसरे के खिलाफ अपने उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में सत्ता की बागडोर पारम्परिक तौर पर कांग्रेस या भाजपा के हाथों में ही रही है और सपा की गिनती "तीसरे ध्रुव" के सियासी दलों में होती है। सपा के एक प्रवक्ता ने बताया कि वर्ष 2013 के पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी ने सूबे की 230 में से 164 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार तो उतारे थे, लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी।

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