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स्वास्थ्य बीमा 40 से 50 साल के आयु वर्ग के लोग ले रहे हैं, इरडा ने कहा-युवाओं पर फोकस कीजिए, जानिए पूरा मामला

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 19, 2020 15:45 IST

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के चेयरमैन सुभाष खुंटिया ने कहा, ‘‘मैं बीमा कंपनियों से बीमारी केंद्रित और उत्पाद बनाने का आग्रह करूंगा। जैसे मधुमेह, हृदय या किडनी संबंधित बीमारियों के लिये अलग से उत्पाद बनाये जा सकते हैं।’’

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ठळक मुद्देपीएफआरडीए चेयरमैन ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को लोगों की जरूरतों के अनुसार नये-नये उत्पाद लाने चाहिए। इस प्रकार के बीमारी केंद्रित उत्पादों के तहत बीमा कंपनियां विशेषज्ञ डॉक्टरों को जोड़ सकती हैं।खुंटिया ने यह भी कहा कि अभी बड़ी संख्या में स्वास्थ्य बीमा 40 से 50 साल के आयु वर्ग के लोग ले रहे हैं।

मुंबईः भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के चेयरमैन सुभाष खुंटिया ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से मधुमेह, किडनी की समस्या जैसी बीमारियों पर केंद्रित उत्पाद लाने को कहा। साथ ही उन्होंने पॉलिसीधारकों को रोग निरोधी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देने को कहा।

पीएफआरडीए चेयरमैन ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को लोगों की जरूरतों के अनुसार नये-नये उत्पाद लाने चाहिए। खुंटिया ने उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के स्वास्थ्य बीमा सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं बीमा कंपनियों से बीमारी केंद्रित और उत्पाद बनाने का आग्रह करूंगा। जैसे मधुमेह, हृदय या किडनी संबंधित बीमारियों के लिये अलग से उत्पाद बनाये जा सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बीमारी केंद्रित उत्पादों के तहत बीमा कंपनियां विशेषज्ञ डॉक्टरों को जोड़ सकती हैं ताकि पॉलिसीधारकों को विभिन्न बीमारियों से बचने के उपायों के बारे में अवगत कराया जा सके। खुंटिया ने यह भी कहा कि अभी बड़ी संख्या में स्वास्थ्य बीमा 40 से 50 साल के आयु वर्ग के लोग ले रहे हैं।

बीमा कंपनियों को युवा आबादी को आकर्षित करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर अधिक संख्या में युवा आबादी स्वास्थ्य बीमा लेती है, और चूंकि संभव है, उनमें से ज्यादातर बीमार नहीं पड़े, इससे वे स्वास्थ्य बीमा कोष में योगदान दे सकेंगे। इससे अन्य लोगों को लाभ होगा।’’

उन्होंने युवाओं को आकर्षित करने के लिये ऐसे जांच या इलाज को बीमा उत्पाद में शामिल करने का सुझाव दिया, जिसके लिये अस्पताल में 24 घंटे भर्ती होने की जरूरत नहीं है। खुंटिया ने सुझाव दिया कि बीमा कंपनियां अपने उत्पादों में परिवारिक चिकित्सकों, सालाना स्वास्थ्य जांच, टीके आदि को शामिल कर सकती हैं। 

टॅग्स :बीमाहेल्थ टिप्सएलआईसी
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