पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य (सांसद) चुने जाने के बाद विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन जदयू प्रमुख अभी तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। अभी भी बिहार में खेला जारी है। बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने गए हैं। नितिन नबीन भी इस्तीफा दिया है। कुमार के राज्यसभा में जाने से बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ सकता है, जिससे राज्य में भाजपा का प्रभाव बढ़ सकता है और पटना में नए नेतृत्व के उदय का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पिछले सप्ताह पत्रकारों से कहा था, "संविधान में यह प्रावधान है कि आपको 14 दिनों के भीतर इस्तीफा देना होगा। घटनाक्रम उसी के अनुरूप है।"
जेडीयू अध्यक्ष 16 मार्च को संसद के उच्च सदन के लिए चुने गए थे। नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर गठबंधन की रणनीति में महारत है। 1985 में विधायक के रूप में अपने सफर की शुरुआत करने और बाद में वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य करने के बाद वे पहली बार 2005 में एनडीए के एक स्तंभ के रूप में बिहार के मुख्यमंत्री बने।
हालांकि 2013 से उनका कार्यकाल गठबंधनों के "लगातार बदलते" क्रम से परिभाषित रहा है, जो 2013, 2017, 2022 और 2024 में भाजपा और महागठबंधन (आरजेडी और कांग्रेस) के बीच बारी-बारी से बदलता रहा। इन लगातार बदलावों के बावजूद, उनका राजनीतिक अस्तित्व अद्वितीय बना हुआ है। 2025 में पांचवीं बार भारी चुनावी जीत हासिल की और रिकॉर्ड तोड़ दसवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस्तीफा दे दिया। नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद नितिन नबीन ने ट्वीट किया कि आज, मैं बिहार विधानसभा में बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले निर्वाचित सदस्य के पद से इस्तीफा दिया। पार्टी द्वारा मुझे सौंपी गई नई भूमिका के माध्यम से, मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र और बिहार राज्य के विकास के लिए सदैव तत्पर और प्रतिबद्ध रहूंगा।
पार्टी कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा अटूट बंधन हमेशा बना रहेगा, जो मुझे नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, मैं वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' और 'विकसित बिहार' के सपने को साकार करने के लिए निरंतर समर्पित रहूंगा।
भारतीय संविधान के अनुसार कोई भी जनप्रतिनिधि एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। नितिन नबीन और सीएम नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, ऐसे में उन्हें विधायक पद छोड़ना अनिवार्य था।इस्तीफे का समय भी राजनीति में अहम संकेत देता है। देरी को केवल प्रशासनिक कारणों से नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा था।