लखनऊः उत्तर प्रदेश में सरकार के पक्ष और विपक्ष में अब सूबे के नौकरशाह भी खुल कर सामने आने लग गए हैं. सोमवार को बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य के साथ हुए दुर्व्यवहार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से लागू किए गए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026 का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरोध में अयोध्या जिले में जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा दिया है.
यूपी में यह पहला मौका है जब 24 घंटे के भीतर दो अधिकारियों में इस्तीफा दिया है. इन दोनों अफसरों के इस्तीफ़ा देने की वजह विभागीय कामकाज में दिक्कत या कोई व्यक्तिगत वजह होना नहीं है.इस कारण इन अधिकारियों के इस्तीफे को राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
समाज में जातिवाद का जहर घोल रहे शंकराचार्य
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को मंगलवार को इस्तीफा भेजने वाले अयोध्या में जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि विगत कई दिनों से प्रयागराज में उत्तर प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणी से वह आहत हुए हैं. मैं उत्तर प्रदेश राज्य का एक साधारण कर्मचारी हूं.
उत्तर प्रदेश सरकार से हमें आजीविका प्राप्त है.उस आजीविका से मेरे परिवार का लालन-पालन होता है. प्रशांत कुमार ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि मेरा राजकीय धर्म है कि अपने प्रदेश की सरकार और सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध यदि कोई अनर्गल बात करता है तो उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी नियमावली का पालन करते हुए उसका विरोध किया जाए.
मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणी को राष्ट्र, संविधान व लोकतंत्र के विरुद्ध मानता हूं. अतः ऐसी स्थिति में सरकार के पक्ष में और अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में मैं अपना त्यागपत्र दे रहा हूं. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध अनर्गल बात की जा रही है,
जिसे मैं राष्ट्र, संविधान व लोकतंत्र के विरुद्ध मानता हूं. अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा भोले-भाले अधिकारियों को प्रलोभन देकर सरकार के विरुद्ध खड़ा किया जा रहा है, जो निश्चित रूप से भारत के संविधान, भारत के लोकतंत्र के विरुद्ध एक साजिश है. अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा समाज में जातिवाद का जहर घोला जा रहा है और देश व प्रदेश को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है.
सोमवार को अलंकार अग्निहोत्री ने दिया था इस्तीफ़ा
इसके पहले सोमवार को जब देश भर में जब 77 वां गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाया जा रहा था, उस दरमियान बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी की ओर से लागू किए गए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026 को भेदभाव विरोधी बताते हुए और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान को लेकर इस्तीफा दिया था.
उन्होंने हाथ से लिखे पांच पेज के अपने इस्तीफे में केंद्र व राज्य सरकारों में ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों द्वारा इन गंभीर मुद्दों पर विरोध न करने पर सवाल उठाया था. प्रदेश की राज्यपाल और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को संबोधित इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी लिखा है कि जनप्रतिनिधि अपने समाज के प्रति जवाबदेह नहीं रहे.
अपने इस्तीफे की वजह उन्होने मीडिया को भी बताई है. उन्होने अपने इस्तीफे की वजह सरकार की नाकामियों को बताया है. यह भी कहा था कि दोनों गंभीर प्रकरणों (यूजीसी और शंकराचार्य) पर केंद्र एवं राज्य सरकार में बैठे ब्राह्मण एवं सामान्य वर्ग के अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई विरोध नहीं जताया गया है.
जबकि इन सभी को अपने समाज का चिंतन और उनके हित से संबंधी नीति निर्धारण के लिए सजातीय जनता द्वारा चुना गया है. यह एक भ्रम और असमंजस की स्थिति है, जिसमें ब्राह्मण एवं सामान्य वर्ग के अन्य जनप्रतिनिधि अपने सजातीय समाज के प्रति जवाबदेह न होकर किसी कॉर्पोरेट कंपनी के सेवक बनकर रह गए हैं.
जनप्रतिनिधियों के इस रवैये से आहत होकर उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा से त्यागपत्र दे रहा हूं. उनके इस्तीफे देने के कुछ घंटे बाद ही सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया था. इसके बाद मंगलवार को प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर सूबे की सियासत को गरमा दिया है.