लखनऊः उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से खफा यूपी कैडर के वर्ष 2022 बैच के आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही ने सेवा से इस्तीफा दे दिया है. रिंकू सिंह राही ने राज्य सरकार पर पोस्टिंग न देने का आरोप लगाया. बताया जा रहा है कि सरकार को भेजे अपने इस्तीफे में रिंकू सिंह ने फील्ड में पोस्टिंग न दिए जाने का आरोप लगाया है. उनका आरोप है कि उन्हें लंबे समय से कोई पोस्टिंग नहीं दी गई और न ही कोई कार्य दिया जा रहा है. रिंकू सिंह राही शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए वकीलों के सामने उठक-बैठक करने को लेकर चर्चा में आए थे. इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें राजस्व परिषद से अटैच कर दिया था. तभी से वह फील्ड में पोस्टिंग पाने की प्रतीक्षा कर रहे थे. रिंकू सिंह अपने इस्तीफे को लेकर मीडिया से बात करने को तैयार नहीं है, उन्हे अब सरकार के फैसले का इंतजार है.
रिंकू सिंह इस साल इस्तीफा देने वाले दूसरे आईएएस हैं, इसके पहले इस वर्ष अनामिका सिंह ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. वर्ष 2004 बैच की आईएएस अफसर अनामिका सिंह केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन किया था, इनके प्रस्ताव को सरकार के ठुकरा दिया तो उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले लिया.
रिंकू सिंह के इस्तीफे में यह लिखा है
फिलहाल रिंकू सिंह राही के इस्तीफा देने से सूबे की नौकरशाही में बड़े अफसरों की मनमानी को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है. सपा के प्रवक्ता सुनील यादव का कहना है कि राज्य में सीएम के नजदीकी अफसर अपनी पसंद के अफसरों को जिलों में तैनात करने के जुटे हैं.
यही वजह है कि रिंकू सिंह जैसे ईमानदार और बहादुर अधिकारी जिलों में पोस्टिंग पाने के इंतजार में दुखी होकर आईएएस कैडर से इस्तीफा देने का फैसला कर रहे हैं. रिंकू सिंह बेहद जुझारू अधिकारी रहे हैं. वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए रिंकू सिंह ने 100 करोड़ रुपए के एक बड़े घोटाले को उजागर किया था.
इसके बाद ही उनके ऊपर जानलेवा हमला हुआ था. उन्हें सात गोलियां मारी गई थी, इसके बाद भी वह बच गए और उन्होने घोटाला करने वालों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी. उन्होंने समाज कल्याण विभाग में कार्य करते हुए ही यूपीएससी की तैयारी जारी रखी. वर्ष 2022 में उन्हें सफलता मिली और उनका चयन आईएएस के लिए हो गया.
संयोग से उन्हें यूपी कैडर भी अलॉट हुआ. आईएएस बनने के बाद उन्हे शाहजहांपुर में एसडीएम के पद पर तैनाती मिली. वहां वकीलों के एक प्रदर्शन के दौरान उनका वकीलों से विवाद हुआ तो वकीलों ने उन्हे घेर लिया और उनसे उठक-बैठक कराई. इसका वीडियो वायरल हुआ तो सरकार ने उन्हे राजस्व परिषद में अटैच कर दिया था.
इस पद पर रहने हुए उनके कोई कार्य नहीं लिया जा रहा था. इस व्यवस्था से ऊब कर उन्होने आईएएस काडर से इस्तीफ़ा देने का फैसला किया. बताया जा रहा है सरकार को भेजे अपने इस्तीफे में उन्होंने यह लिखा है कि राजस्व परिषद में उनको कार्य करने का अवसर नहीं दिया गया और यहां संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम चल रहा है.
इन अफसरों ने आईएएस सेवा से नाता तोड़ा
योगी सरकार में सरकार की व्यवस्था से खिन्न होकर इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह अकेले नहीं हैं. बीते दो वर्षों वर्षों के रिग्जियान सैंफिल, विकास गोठलवाल, विद्या भूषण, रेणुका कुमार, जूथिका पाटणकर, मोहम्मद मुस्तफा, अभिषेक सिंह और अनामिका सिंह ने भी आईएएस सेवा से नाता तोड़ा है.
2003 बैच के आईएएस अधिकारी रिग्जियान सैंफिल मुख्यमंत्री के सचिव थे और व्यक्तिगत कारण बताकर उन्होंने पिछले साल वीआरएस लिया था. इसी प्रकार 2008 बैच के आईएएस अधिकारी विकास गोठलवाल ने निजी कारणों के चलते इस्तीफा देकर आईएएस सेवा से नाता तोड़ लिया.
2008 बैच के आईएएस विद्या भूषण का अपने सीनियर अफसरों से विवाद हुआ तो उन्होंने बिना बताए छुट्टी ले ली. तो उन्हे निलंबित कर दिया गया इसके बाद उन्होंने बीते साल वीआरएस ले लिया. 1997 बैच की सीनियर आईएएस रेणुका कुमार ने भी सरकार के व्यवहार से नाखुश होकर व्यक्तिगत कारणों से हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया.
जबकि 1988 बैच की आईएएस जूथिका पाटणकर ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ दिया है. 1995 बैच के आईएएस मोहम्मद मुस्तफा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहना चाहते थे, आग्रह पर विचार नहीं किया गया तो उन्होने भी निजी कारणों से इस्तीफा देने के लिए वीआरएस मांग लिया. 2011 बैच के आईएएस अभिषेक सिंह को नौकरी में लापरवाही बरतने को लेकर निलंबित किया गया था. जिसके बाद में उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी.