मुंबईः शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्होंने 2014 और 2019 में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए चुनाव प्रचार किया था, लेकिन मोदी उनकी पार्टी को खत्म करने पर तुले हुए हैं। ठाकरे ने कहा, "मुझे दुख और गुस्सा है कि मैंने 2014 और 2019 में मोदी जी के लिए प्रचार किया। दो बार उनकी मदद करने के बाद भी उन्होंने मेरी पार्टी को तोड़ दिया।" ठाकरे ने कहा, “मैं कह रहा था कि उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए। अब वे कह रहे हैं कि मेरा काम तमाम हो जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “लोगों को ये दोनों बातें समझ आने लगी हैं।”
ठाकरे ने यह भी कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना भाजपा का "पुराना सपना" है। उन्होंने कहा, “अब उन्हें लगता है कि बालासाहेब ठाकरे नहीं रहे और उन्होंने कागज़ों में शिवसेना को खत्म कर दिया है। लेकिन ज़मीन पर वे ऐसा नहीं कर सकते।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "आपने देखा होगा कि 2012 तक, जब बालासाहेब थे, तब वे (भाजपा) सीधे थे।" जब उनसे राजनीति के “गिरते स्तर” के लिए किसी को ज़िम्मेदार ठहराने के बारे में पूछा गया, तो ठाकरे ने कहा,“किसी एक व्यक्ति से ज़्यादा इसके लिए रवैया ज़िम्मेदार है- जैसे भाजपा का रवैया है।”
कभी अलग नहीं होंगे: राज के साथ एकजुटता पर उद्धव ठाकरे
शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे कभी अलग नहीं होंगे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और उनके चचेरे भाई उद्धव ने नगर निगम चुनावों से पहले गठबंधन किया है। उद्धव ने कहा, ‘‘जब तक हम साथ नहीं आए थे, लोग हमसे पूछते थे कि हम साथ क्यों नहीं आ रहे हैं।
अब वे पूछ रहे हैं कि हम साथ क्यों आए हैं और कब तक साथ रहेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन बातों का ज्यादा महत्व नहीं है। हमने बहुत सोच-विचार और समझदारी से एक साथ आने का फैसला किया है। अब हम कभी अलग नहीं होंगे और एकजुट रहेंगे।’’ लगभग दो दशकों में पहली बार राजनीतिक रूप से एक साथ आते हुए, उद्धव और राज ठाकरे ने पिछले महीने मुंबई और महाराष्ट्र के 28 अन्य नगर निगमों में 15 जनवरी को होने वाले चुनावों से पहले गठबंधन की घोषणा की।
जब उनसे पूछा गया कि क्या बतौर नेता उद्धव ठाकरे, उत्साही फोटोग्राफर उद्धव ठाकरे से अधिक महत्वपूर्ण हैं, तो शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा, “मैं मूल रूप से एक कलाकार हूं। मैं एक कार्टूनिस्ट (शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे) का पुत्र हूं। आप कलाकृति खरीद सकते हैं, लेकिन कला नहीं खरीद सकते।”
उन्होंने कहा, “कला खून में होनी चाहिए। मैं कला को सहज महसूस करता हूं।” उद्धव ने याद दिलाया कि राज ठाकरे के पिता श्रीकांत ठाकरे ने ही उन्हें पहला कैमरा दिया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कोई और ऐसा नेता नजर आता है जिसके खून में कला बसी हो, तो उद्धव ने कहा, “(प्रधानमंत्री) मोदी जी ऐसे ही एक व्यक्ति हैं। क्या आपके दिमाग में कोई और आता है?”