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तमिलनाडु: दोबारा तोड़ी गई पेरियार की मूर्ति, गांधी से लेकर नेहरू की प्रतिमाओं के साथ हो चुकी है छेड़छाड़

By पल्लवी कुमारी | Updated: March 20, 2018 10:14 IST

Periyar Statue Case: त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के बाद वहां लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई। जिसके बाद से ही देश में प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ का मामला देखने को मिल रहा है।

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चेन्नई, 20 मार्च; पश्चिम बंगाल देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ के बाद तमिलनाडु में भी ऐसा ही मामला देखने को मिला है। तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टई में कुछ अज्ञात व्यक्तियों  ने पेरियार की प्रतिमा को तोड़ दिया है। पेरियार की प्रतिमा में साफ देखा जा सकता है कि उनकी मूर्ति के धर से सिर अलग है। 

पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच में जुट गई है। घटना 19 मार्च के रात की है। गौरतलब है कि  16 मार्च को पश्चिम बंगाल में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ की गई है। यहां पूर्वी बर्दमान इलाके में कुछ असामाजिक तत्वों ने जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति पर स्याही फेंकी थी। 

बता दें कि इससे पहले भी तमिलनाडु के वेल्लूर जिले में पेरियार की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ की गई थी। जिस मामले में तमिलनाडु पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था। ये घटना 6 मार्च की है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार शख्स में से एक का नाम मुरुगानंदम है। जो वेल्लूर में बीजेपी के शहर महासचिव हैं। दूसरे व्यक्ति का नाम फ्रांसिस है और वो कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ का मामला त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति को तोड़ने के बाद से शुरू हुआ है।  लेनिन की मूर्ति के बाद तमिलनाडु में पेरियार, कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, केरल में महात्मा गांधी, यूपी में अंबेडकर के बाद भगवान हनुमान की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ हुई थी। 

प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़ करने वाले मामले की उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इसकी निंदा की है। इनका कहना है कि ऐसा करने से सिर्फ देश का माहौल खराब हो रहा है। 

कौन है पेरियार

पेरियार द्रविड़ राजनीति के जनक हैं। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। ये दलितों के आदर्श माने जाते हैं। इन्हें दलित चिंतक भी कहा जाता है। इनका जन्म 17 सितंबर 1879 में मद्रासी परिवार में हुआ था। ये राष्ट्रपति महात्मा गांधी से प्रेरित थे। लेनिन 1919 में कांग्रेस में शामिल हुए थे।किन 1925 में उन्होंने इससे इस्तीफा दे दिया था। उनका मानना था कि सरकार ब्राह्मण और उच्च जाति के लोगों का हित साधती है।

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