इंदौरः 'ऑपरेशन सिंदूर' मामले में कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। सोमवार को चीफ जस्टिस सनजय किशन कौल और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी (सेक्शन) पर फैसला ले।
बेंच ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट खोली और कहा कि अब तक सेक्शन न देना गंभीर सवाल खड़े करता है। बेंच ने साफ कहा, "राज्य सरकार दो हफ्तों में सेक्शन देने पर विचार करे। अब तक देरी क्यों हुई, इसका जवाब चाहिए।" मंत्री के वकील ने दलील दी कि शाह ने माफी मांग ली है, लेकिन बेंच ने दो टूक कहा, "अब बहुत देर हो चुकी, माफी बेकार।" पहले की ऑनलाइन माफी को भी खारिज किया।
बेंच ने जुड़े मामले में एसआईटी से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी। विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के पास महू के रायकुंडा गांव में 'हलमा' कार्यक्रम के दौरान विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा, "आतंकियों को सबक सिखाने के लिए उनकी बहन को भेजा गया।" यह टिप्पणी ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया ब्रीफिंग कर रही कर्नल सोफिया कुरैशी पर थी। बयान वायरल होने पर भारी विवाद हुआ।
पहले की जानकारी संक्षिप्त में
ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल 2025) के बाद भारत की सीमा पार कार्रवाई था। 14 मई 2025 को एमपी हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान ले मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 19 मई 2025 को बेंच ने माफी को 'मगरमच्छ के आंसू' कहा, एसआईटी गठित की। एसआईटी ने अभियोजन की सिफारिश की।