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एसटीएफ ने पीएफआई के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया, आतंकवादी हमलों की साजिश विफल करने का दावा

By भाषा | Updated: February 16, 2021 22:16 IST

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लखनऊ, 16 फरवरी उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के मामले से चर्चा में आए संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो सदस्यों को मंगलवार को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से विस्फोटक बरामद करने का दावा किया।

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने देर शाम यहां संवाददाताओं को बताया कि इस गिरफ्तारी के जरिये एसटीएफ ने हिन्दूवादी संगठनों के कार्यक्रमों में विस्फोट कर दहशत फैलाने की साजिश नाकाम कर दी है।

कुमार ने बताया कि एसटीएफ ने पीएफआई के सक्रिय सदस्यों अंसद बदरुद्दीन और फिरोज खान को गुडम्बा थाना क्षेत्र स्थित कुकरौल तिराहे के पास गिरफ्तार किया है। ये दोनों केरल के रहने वाले हैं। उनके कब्जे से भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला विस्फोटक बरामद किया गया है।

उन्होंने दावा किया कि पकड़े गये लोगों का इरादा बसंत पंचमी के आस पास हिन्दूवादी संगठनों के कार्यक्रमों में कई जगहों पर बम विस्फोट कर संगठनों के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं आमजन की हत्या कर दहशत फैलाने और सामाजिक एवं धार्मिक विद्वेष उत्पन्न करना था।

इस बीच, एसटीएफ के सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से ऐसी खुफिया खबरें मिल रही थी कि पीएफआई के कुछ सदस्य ‘‘एक आतंकवादी गिरोह बनाकर सरकार के विरूद्ध युद्ध छेड़ने तथा सामाजिक विद्वेष फैलाने के लिये प्रदेश के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों तथा प्रमुख हिन्दू संगठनों के बड़े पदाधिकारियों पर एक साथ हमला करने की साजिश’’ रच रहे हैं।

मंगलवार को यह सूचना मिली कि पीएफआई के दो सदस्य अंसद बदरूद्दीन और फिरोज अपने साथियों के साथ लखनऊ में कुकरैल पिकनिक स्पाट में मिलेंगे और वे बसंत पंचमी के आस पास हिन्दूवादी संगठनों के कार्यक्रमों में कई जगहों पर उच्च श्रेणी विस्फोटक से धमाका करने की फिराक में हैं।

सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्तों ने प्रारम्भिक पूछताछ में बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए वर्ग विशेष के युवाओं को बरगलाने के बाद उन्हें विभिन्न हथियारों का प्रशिक्षण देकर देश के किसी भी कोने में वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार करने का था।

गिरफ्तार अभियक्तों के विरूद्ध लखनऊ के एटीएस थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

गौरतलब है कि पीएफआई का नाम संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ दिसंबर 2019 में हुए हिंसक प्रदर्शनों के मामले में आया था। सरकार ने इस हिंसा के लिए इस संगठन को जिम्मेदार ठहराया था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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