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लालू परिवार में रार जारी?, सच्चाई से मुंह कौन चुरा रहा, साफ हो जाएगा, सवाल पहले भी उठे थे, आज भी सवाल उठ रहे और आगे भी उठेंगे?, रोहिणी आचार्य ने संजय यादव पर साधा निशाना

By एस पी सिन्हा | Updated: January 27, 2026 17:26 IST

रोहिणी ने राजद में बाहर से आए नेताओं पर सवाल उठाए और पार्टी को बर्बादी के कगार पर ले जाने का आरोप लगाया। 

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ठळक मुद्देधो-पोछकर पार्टी को बर्बादी की कगार पर ला कर खड़ा कर दिया।ज्ञान देने की बात कर सच्चाई से मुंह कौन चुरा रहा, ये साफ हो जाएगा। घटिया लोगों को, लालू जी को नजरअंदाज कर, एक तरीके से सर्वेसर्वा बना दिया गया।

पटनाः लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। तेजस्वी यादव को पार्टी का ‘कार्यकारी अध्यक्ष’ बनाए जाने के फैसले ने परिवार और पार्टी के भीतर की रार को सतह पर ला दिया है। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए मोर्चा खोलते हुए सीधे तौर पर तेजस्वी यादव और उनके करीबी रणनीतिकार संजय यादव को निशाने पर लिया है। रोहिणी ने राजद में बाहर से आए नेताओं पर सवाल उठाए और पार्टी को बर्बादी के कगार पर ले जाने का आरोप लगाया। 

रोहिणी ने एक्स पर लिखा है कि "लालू जी और पार्टी के लिए किसने क्या किया" ये तो लोकसभा, हालिया संपन्न विधानसभा के चुनावी नतीजों और पार्टी की वर्त्तमान स्थिति से ही साफ़ है, जिसे जिम्मेदारी सौंपी गयी उसने, आयातित गुरु और उस गुरु के गुर्गों ने तो लालू जी व पार्टी के प्रति समर्पित हरेक लालूवादी के दशकों के संघर्ष एवं प्रयासों को धो-पोछकर पार्टी को बर्बादी की कगार पर ला कर खड़ा कर दिया।

सवाल पहले भी उठे थे, आज भी सवाल उठ रहे हैं, आगे भी उठेंगे, अगर नैतिक साहस है तो खुले मंच पर सवालों का सामना करने की हिम्मत जुटानी चाहिए, ज्ञान कौन दे रहा और ज्ञान देने की बात कर सच्चाई से मुंह कौन चुरा रहा, ये साफ हो जाएगा। आज पार्टी के हरेक सच्चे कार्यकर्ता, समर्थक और हितैषी का सवाल है।" जिन घटिया लोगों को, लालू जी को नजरअंदाज कर, एक तरीके से सर्वेसर्वा बना दिया गया।

 उन लोगों ने पार्टी के लिए क्या किया? और समीक्षा के नाम किए गए दिखावे पर क्या कार्रवाई की गई? समीक्षा रिपोर्ट अब तक क्यूं नहीं सार्वजनिक की गई और समीक्षा रिपोर्ट में जिन लोगों पर सवाल उठे उन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यूं नहीं की गई?" रोहिणी ने हार की टीस को शब्दों में पिरोते हुए कहा कि पार्टी के लिए किसने खून-पसीना बहाया और किसने सिर्फ पद का आनंद लिया।

यह हालिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों के परिणामों से स्पष्ट है। उनका इशारा साफ था कि नेतृत्व की विफलता के कारण ही पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की दुर्गति को लेकर रोहिणी आचार्य लगातार नेतृत्व पर सवाल उठा रही हैं। खासकर उनके निशाने पर बाहर से पार्टी में शामिल हुए नेताओं पर है।

तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर बोला तीखा हमला

बिहार में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। राज्य में बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला है। गोपालगंज में महज डेढ़ साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान एनडीए सरकार में बिहार की बच्चियां पूरी तरह असुरक्षित हैं।

तेजस्वी ने राज्य की वर्तमान स्थिति को "आपातकालीन परिस्थिति" करार दिया है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में प्रतिदिन होने वाली आपराधिक घटनाएं अब असहनीय और डरावनी हो गई हैं। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि सत्ता के संरक्षण में पल रहे अपराधी बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। यह स्थिति न केवल पीड़ादायक है, बल्कि आम नागरिकों में सिहरन पैदा करने वाली है।

तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार केवल "मशीन और मशीनरी" (वोट प्रबंधन) के दम पर जीत के नशे में चूर है। उन्होंने मंत्रियों और नेताओं को नसीहत दी कि वे विपक्ष पर फिजूल की बयानबाजी करने के बजाय अपनी बदहाल शिक्षा, स्वास्थ्य और लचर कानून-व्यवस्था में सुधार पर ध्यान दें।

अपने बयान के जरिए तेजस्वी यादव ने संदेश दिया कि सरकार को अब जागना होगा। उन्होंने हालिया घटनाओं (मधेपुरा, खगड़िया और पटना की घटनाओं समेत) का हवाला देते हुए कहा कि बिहार की विधि-व्यवस्था का जनाजा निकल चुका है और मुख्यमंत्री की चुप्पी अपराधियों को शह देने के समान है।

उन्होंने चेतावनी भरी अपील करते हुए कहा कि संभलो तंत्र से जीती सरकार, करो अपराधी दानवों का संहार, बचाओ बेटियों की जान।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो उसे सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

बता दें कि पटना के शंभू हॉस्टल में रहने वाली जहानाबाद की छात्रा की संद्ग्ध मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस की जांच और सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। जांच मे हो रही देरी को लेकर राजनीतिक दलों का आरोप है कि सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। अब सभी को एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार है।

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