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किसानों को राहत, 30 नवंबर तक किसान सम्मान निधि के लिए आधार नंबर दे सकते हैं, सालाना 6000 की आर्थिक मदद

By भाषा | Updated: October 9, 2019 16:11 IST

‘‘मंत्रिमंडल ने एक अगस्त 2019 के बाद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत राशि जारी करने को लेकर खाते से आधार को अनिवार्य रूप से जोड़ने की समयसीमा 30 नवंबर 2019 करने का निर्णय किया है।’’

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ठळक मुद्देमोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय किया गया।उन्होंने कहा कि रबी फसलों की बुवाई से पहले किसानों को राहत देने के मकसद से यह कदम उठाया गया है।

सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) योजना के तहत 6,000 रुपये सालाना लाभ लेने के लिये खाते को आधार से जोड़ने की समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ा दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय किया गया। बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने एक अगस्त 2019 के बाद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत राशि जारी करने को लेकर खाते से आधार को अनिवार्य रूप से जोड़ने की समयसीमा 30 नवंबर 2019 करने का निर्णय किया है।’’

उन्होंने कहा कि रबी फसलों की बुवाई से पहले किसानों को राहत देने के मकसद से यह कदम उठाया गया है। मंत्री ने कहा कि 7 करोड़ किसान पहले ही पीएम-किसान योजना के तहत लाभान्वित हो चुके हैं। इसके तहत किसानों को तीन समान किस्तों पर 6,000 रुपये सालाना दिये जा रहे हैं। 

कैबिनेट फैसला:     पीओके से आए 5300 परिवारों को प्रति परिवार 5.5 लाख रुपये देने पर मुहर

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर :पीओके: से आए विस्थापित 5300 परिवारों को प्रधानमंत्री द्वारा 2016 में घोषित पैकेज का लाभ प्रदान करने पर बुधवार को मुहर लगाई। इन परिवारों को तब इसका लाभ नहीं मिल सका।

पैकेज के तहत प्रति परिवार एकमुश्त 5.5 लाख रुपये प्रदान करने का प्रावधान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस आशय का निर्णय किया गया। बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘ साल 2016 में प्रधानमंत्री ने पीओके के विस्थापितों के लिये 5.5 लाख रुपये प्रति परिवार के पैकेज की घोषणा की थी।

लेकिन तब इसमें 5300 परिवार शामिल नहीं हो सके थे क्योंकि वे जम्मू कश्मीर से बाहर थे और उनका नाम नहीं आया था। ’’ उन्होंने बताया कि आज के निर्णय से 5300 परिवारों को इसमें शामिल कर लिया गया है । जावडेकर ने कहा कि इस फैसले से इन परिवारों के साथ न्याय हुआ है। इस फैसले का पूरे कश्मीर घाटी में स्वागत होगा।

उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में कई तरह के विस्थापित समूह हैं । इसके तहत एक समूह ऐसे विस्थापितों का है जो 1947 के बाद आया। दूसरा समूह ऐसे विस्थापितों का है जो जम्मू कश्मीर के विलय के बाद आया । इसमें 5300 परिवार ऐसे थे जो पीओके से आए लेकिन दूसरे राज्यों में चले गए थे । मंत्री ने कहा कि जो फिर से जम्मू कश्मीर आ गए है, उन्हें इसमें शामिल किया गया है। 

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