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संत रविदास मंदिर मामला: दक्षिणी दिल्ली के तुगलकाबाद में मंदिर के लिए जमीन देने के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 21, 2019 14:49 IST

इससे पहले पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था वह दक्षिण दिल्ली में गुरु रविदास मंदिर के निर्माण के लिए श्रद्धालुओं को 200 वर्ग मीटर भूमि कुछ शर्तों के साथ देने को तैयार है।

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ठळक मुद्देसंत रविदास के लिए दक्षिणी दिल्ली में केंद्र के जमीन देने के प्रस्ताव पर कोर्ट की मंजूरीतुगलकाबाद के वन क्षेत्र में मंदिर निर्माण के लिये 400 वर्गमीटर भूमि देने के केन्द्र के प्रस्ताव को मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को स्वीकर कर लिया है जिसमें दक्षिण दिल्ली के तुगलकाबाद में संत गुरु रविदास मंदिर के निर्माण के लिए श्रद्धालुओं को जमीन देने की बात कही है। केंद्र सरकार ने ये भी कहा है कि वह रविदास मंदिर के लिए दी जाने वाली प्रस्तावित जमीन के क्षेत्र को भी बढ़ाने के लिए तैयार है। 

कोर्ट ने साथ ही यह भी निर्देश दिया कि मंदिर के लिये निर्धारित जगह के आस-पास कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि नहीं चलायेगा। शीर्ष अदालत ने इस मंदिर को गिराये जाने की घटना के विरोध में आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को उनके द्वारा निजी मुचलका देने पर रिहा करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने केंद्र को ये भी निर्देश दिया कि वह 6 हफ्ते में एक कमेटी बनाए जो यहां होने वाले निर्माण पर नजर रखेगा।

इससे पहले पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था वह दक्षिण दिल्ली में गुरु रविदास मंदिर के निर्माण के लिए श्रद्धालुओं को 200 वर्ग मीटर भूमि कुछ शर्तों के साथ देने को तैयार है। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल के. वेणुगोपाल के प्रस्ताव को दर्ज किया और मंदिर के निर्माण की मांग कर रहे पक्षकारों से कहा कि यदि उन्हें कोई आपत्ति है तो वे सोमवार तक इसे दर्ज कराएं।  

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के तुगलकाबाद वन क्षेत्र में गुरु रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण की अनुमति का अनुरोध करने संबंधी याचिका के संबंधित पक्षकारों से चार अक्टूबर को कहा था कि वे मंदिर के लिये एक बेहतर जगह के सर्वमान्य समाधान के साथ उनके पास वापस आएं। कोर्ट ने कहा था कि वह सभी की भावनाओं का सम्मान करता है लेकिन कानून का पालन तो करना ही होगा। कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था जिसके बाद राष्ट्रीय राजधानी में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

(भाषा इनपुट)

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