पटनाः बिहार में जारी सियासी हलचल के बीच राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी(रालोजपा) की हुई बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव किया गया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने चंदन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। गुरुवार को पटना में बुलाई गई एक आपात बैठक में पारस ने खुद चंदन सिंह के नाम का ऐलान किया और उन्हें माला पहनाकर जिम्मेदारी सौंपी। इससे पहले बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी पारस के भतीजे प्रिंस राज संभाल रहे थे। प्रिंस को हाल ही में पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इसकी जानकारी पशुपति कुमार पारस ने दी।
उन्होंने कहा कि चंदन सिंह के परिवार से उनका संबंध वर्ष 2004 से है और उसी विश्वास के आधार पर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पारस ने उम्मीद जताई कि चंदन सिंह के नेतृत्व में पार्टी और संगठन को मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर भी पारस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सब भाजपा का खेल है।
नीतीश कुमार के साथ जो कुछ भी हुआ, वह ठीक नहीं हुआ। बैठक के दौरान संगठन विस्तार और आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा की गई। संभावना यह जताई जा रही है कि अगले दो महीनों में प्रिंस राज पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे। इसी वजह से बिहार अध्यक्ष का पद खाली था। इसे भरने के लिए पारस ने अपने पुराने भरोसेमंद साथी चंदन सिंह को चुना है।
बता दें कि चंदन सिंह बिहार के बाहुबली नेता एवं पूर्व सांसद सूरजभान सिंह के छोटे भाई हैं। वे 2019 में नवादा सीट से सांसद रह चुके हैं। जब लोजपा दो गुटों में बंटी थी, तब चंदन सिंह ने पशुपति पारस का साथ दिया था। पिछले करीब एक साल से खराब स्वास्थ्य की वजह से वे राजनीति में ज्यादा सक्रिए नहीं थे, लेकिन अब बड़े पद के साथ उनकी दोबारा एंट्री हुई है।
उनके बड़े भाई सूरजभान सिंह पिछले चुनाव से ठीक पहले पारस का साथ छोड़कर राजद में शामिल हो गए थे। सियासत क जानकारों का कहना है कि यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब रालोजपा अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
एनडीए में जगह न मिलने और महागठबंधन से बात न बनने की वजह से पार्टी को अकेले चुनाव लड़ना पड़ा। इसमें एक भी सीट हाथ नहीं लगी। अब चंदन सिंह के सामने चुनौती होगी कि वे बिखरे हुए कार्यकर्ताओं को एकजुट करें और आने वाले समय में पार्टी मजबूत करें।