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विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों ने की पेप्सिको के पंजीकृत आलू किस्म की बुवाई

By भाषा | Updated: November 27, 2019 06:20 IST

PepsiCo: पेप्सिको ने 2016 में एफएल-2027 किस्म को पंजीकृत कराया और इसे खेती के लिए गुजरात में पेश किया था। कंपनी इसका इस्तेमाल अपने ‘लेज’ ब्रांड के चिप्स उत्पादन में करती है

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ठळक मुद्देविरोध कर रहे किसानों ने पेप्सी की पंजीकृत आलू किस्म ‘एफएल-2027’ की बुवाई कीपेप्सिको ने कुछ आलू किसानों पर आलू की इस किस्म की बुवाई के लिए मुकदमा किया था

अहमदाबाद: पेप्सिको कंपनी के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसानों ने मंगलवार को कंपनी द्वारा पंजीकृत आलू की किस्म ‘एफएल-2027’ की बुवाई की। पेप्सिको का दावा है कि आलू की यह किस्म उसकी है। किसानों ने इस दावे के विरोध में इस आलू बीज की यहां बुवाई की।

गुजरात के किसान दावा करते रहे हैं कि पौध किस्म का संरक्षण एवं किसान अधिकार प्राधिकार-2001 (पीपीवीएफआर) के तहत वे कंपनी की अनुमति के बिना भी बीज की बुवाई कर सकते हैं।

पेप्सिको ने 2016 में एफएल-2027 किस्म को पंजीकृत कराया और इसे खेती के लिए गुजरात में पेश किया था। कंपनी इसका इस्तेमाल अपने ‘लेज’ ब्रांड के चिप्स उत्पादन में करती है। इस साल 23 सितंबर को पेप्सिको ने पीपीवीएफआर कानून से संबंधित प्राधिकरण को लिखे एक पत्र में कहा था कि एफएल-2027 के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र धारक के रूप में उसके पास उसके अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार है।

बीज अधिकार मंच के कपिल शाह ने कहा कि किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले विभिन्न संगठनों ने किसानों को बिना किसी डर के बीज बोने को कहा है। उन्होंने मंगलवार के प्रतीकात्मक स्तर पर की गयी इस बुवाई को ‘सत्याग्रह’ करार दिया। भारतीय किसान संघ के विठ्ठलभाई पटेल ने कहा, ‘‘किसान कौन-सा बीज बोयेंगे। ये चुनते समय उन्हें किसी का डर नहीं होना चाहिये और जब तक कोई बीज ब्रांडेड ना हो तब तक वह किसी भी किस्म के बीज से पैदा की गयी फसल को बेच भी सकते हैं।

पेप्सिको ने इससे पहले राज्य में कुछ आलू किसानों पर आलू की इस किस्म की बुवाई के लिए मुकदमा किया था और उनसे अपने अधिकारों के कथित उल्लंघन के लिए 20 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक की क्षतिपूर्ति की मांग की थी। लेकिन मई में उसने अपने मामलों को वापस ले लिया था। किसान अधिकार कार्यकर्ताओं ने उसके बाद ‘पीपीएफ एंड एफआर प्राधिकरण’ को पत्र लिख कर मांग की कि कंपनी के एफएल-2027 के पंजीकरण के प्रमाणपत्र को रद्द किया जाए।

मंगलवार के इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करने के लिए कंपनी के प्रवक्ता उपलब्ध नहीं थे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि गुजरात में उगाए जाने वाले लगभग 20 फीसदी आलू एफएल-2027 किस्म के हैं और किसान को इससे ज्यादा आय मिलती हैं। 

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