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अनाथ बच्चों के लिए ओडिशा सरकार लायी ‘आशीर्वाद’ योजना

By भाषा | Updated: June 20, 2021 17:32 IST

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भुवनेश्वर, 20 जून कोविड-19 महामारी के बाद पिछले साल से लेकर अब तक कई बच्चों के अनाथ होने पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने रविवार को ऐसे सभी बच्चों को वित्तीय मदद मुहैया कराने के लिए एक योजना शुरू की जिन्होंने किसी भी वजह से अपने माता-पिता में से किसी एक को या दोनों को खो दिया।

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि अप्रैल 2020 से लागू ‘आशीर्वाद’ योजना के लाभार्थियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहले वे जो अनाथ हो गए हैं, दूसरे वे जिन्हें बाल गृह जाना पड़ा और तीसरे वे बच्चे जिन्होंने अपने माता-पिता में से कमाने वाले सदस्य को खो दिया।

इस योजना के तहत सरकार हर उस बच्चे को प्रति महीने 2,500 रुपये देगी जिसने अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों को खो दिया है। यह धनराशि लाभार्थियों के संरक्षक या देखभाल करने वाले के बैंक खाते में भेजी जाएगी जब तक कि वे 18 साल के नहीं हो जाते। अगर देखभाल करने वाले किसी व्यक्ति के न होने पर ऐसे बच्चों को बाल गृह भेजा जाता है तो उन्हें हर महीने 1,000 रुपये अतिरक्त दिए जाएंगे।

इसी तरह जिन बच्चों के माता-पिता में से कमाने वाले सदस्य की मौत हो गयी है तो उन्हें 1,500 रुपये दिए जाएंगे। अगर उनकी माताएं मधु बाबू पेंशन योजना के योग्य हैं तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भत्ते दिए जाएंगे।

ऐसे सभी बच्चे केंद्र और राज्य सरकार की खाद्य योजनाओं और बीजद सरकार की बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना के तहत नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएं ले सकेंगे। राज्य सरकार स्कूलों में उनकी शिक्षा की भी व्यवस्था कराएगी। अगर जरूरत पड़ी तो आदर्श विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों में ऐसे बच्चों के दाखिले के लिए व्यवस्था की जाएगी। उन्हें राज्य की ‘ग्रीन पैसेज’ योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए मदद मिलेगी।

राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों के संरक्षकों और देखभाल करने वाले लोगों को विभिन्न योजनाओं के तहत पक्का मकान देने का भी फैसला किया है। हालांकि ‘आशीर्वाद’ योजना उन बच्चों पर लागू नहीं होगी जिन्हें किसी ने गोद लिया है।

पटनायक के योजना का शुभारंभ करते हुए जिला बाल संरक्षण ईकाइयों, चाइल्डलाइन, मंडल और पंचायत स्तर की समितियों और अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले कर्मियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई लाभार्थी छूट न जाए। उन्होंने कहा कि जिलाधीश अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे बच्चों की पहचान के लिए हर साल एक विशेष अभियान चलाएंगे।

बयान में कहा गया है कि संरक्षकों और बच्चों की देखभाल करने वालों को ‘आशीर्वाद’ योजना के तहत लाभ उठाने के लिए बाल संरक्षण ईकाइयों के पास मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ संपर्क करने को कहा गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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