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नीतिगत संदर्भ में नहीं देख रहे : भारत को मिल रही विदेशी सहायता पर श्रृंगला ने कहा

By भाषा | Updated: April 29, 2021 17:53 IST

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नयी दिल्ली, 29 अप्रैल विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है जो पहले कभी नहीं थी और ऐसे में भारत अपने सहयोगी और मित्र देशों से मिलने वाली चिकित्सा आपूर्ति एवं सहायता को किसी नीतिगत ढांचे के दायरे में नहीं देख रहा है ।

विदेश सचिव ने डिजिटल माध्यम से विशेष प्रेस वार्ता में कहा कि जब महामारी शुरू हुई थी तब भारत ने दुनिया के देशों को हाइड्राक्सिक्लोरोक्वीन एवं पैरासिटामोल सहित अन्य आवश्यक दवाओं की आपूर्ति की थी और यहां तक कि रेमडेसिविर दवा भी दी थी और अब दुनिया के देश भारत को सहयोग देने के लिये आगे आ रहे हैं ।

उन्होंने कहा कि ‘टीका मैत्री’ अभियान के तहत भी भारत ने अन्य देशों को टीका उपलब्ध कराया है ।

विदेश सचिव का यह जवाब तब आया जब उनसे पूछा गया कि क्या विदेशी सहायता स्वीकार नहीं करने की भारत की नीति में कोई बदलाव आया है ।

श्रृंगला ने कहा, ‘‘ हमने वसुधैव कुटुम्बकं के सिद्धांत के तहत सहायता पहुंचायी और अब हमें सहायता मिल रही है । आज दुनिया एक दूसरे से जुड़ी हुई है । ’’

विदेश सचिव ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए अमेरिका, रूस, यूरोप, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूएई्, खाड़ी देशों, पड़ोसी देशों सहित 40 देशों से सहयोग की पेशकश की गई है ।

उन्होंने कहा कि भारत महामारी को लेकर जागरूकता फैलाने को लेकर आगे रहा है कि इससे कोई देश अकेले नहीं निपट सकता है और इसे रोकने के लिये सामूहिक पहल की जरूरत है ।

उन्होंने कहा, ‘‘ वे (विभिन्न देश) सहयोग कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह समय है जब उन्हें भारत की मदद करनी चाहिए ।’’

श्रृंगला ने कहा कि उन्हें लगता है कि भारत ने मदद की थी और अब उन्हें भारत की मदद करनी चाहिए । ऐसे में वह इसे नीतिगत संदर्भ में नहीं देख रहे हैं ।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम इसे परिस्थिति के संदर्भ में देख रहे हैं जो अस्वभाविक है, अभूतपूर्व है । किसी ने पहले ऐसी स्थिति नहीं देखी । हम अपने लोगों के लिये जो भी जरूरी होगा, वह करेंगे । ’’

विदेश सचिव ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और अन्य सहोगी देशों ने सहायता की घोषणा करते हुए पिछले वर्ष भारत के सहयोग की सराहना की ।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमें जिन सामग्रियों की जरूरत है, उसके बारे में प्राथमिकता तय कर रहे हैं । हम इस सामग्रियों को कई देशों से प्राप्त कर रहे हैं । कई देश खुद पहल करते हुए आगे आए हैं । ’’

विदेश सचिव ने महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिये क्षेत्रीय और वैश्विक सम्पर्क का उल्लेख किया ।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देशों को साथ मिलकर सहयोग करने की जरूरत है । इसलिये पिछले वर्ष मार्च में हमने दक्षेस सम्मेलन का आयोजन किया और इसके बाद जी-20 शिखर बैठक की पहल की ।

उन्होंने कहा कि यह अन्य देशों के साथ परस्पर जुड़ी दुनिया है और टीका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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