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नए कृषि कानूनों ने बहुत कम समय में किसानों की समस्याओं को कम करना शुरू किया है: मोदी

By भाषा | Updated: November 29, 2020 20:14 IST

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नयी दिल्ली, 29 नवंबर केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में जारी किसानों के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि इन कृषि सुधारों ने किसानों के लिए अवसरों के नए द्वार खोले हैं और उन्हें नए अधिकार दिए हैं।

मोदी ने अपने मासिक ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि सितंबर में लागू होने के बाद से बहुत कम समय में इन कानूनों ने किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है।

उन्होंने महाराष्ट्र के एक किसान का उदाहरण दिया जिन्होंने एक कारोबारी द्वारा वादे के मुताबिक भुगतान नहीं किये जाने पर पैसा प्राप्त करने के लिए इन कानूनों के प्रावधानों का इस्तेमाल किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत में खेती और उससे जुड़ी चीजों के साथ नए आयाम जुड़ रहे हैं। बीते दिनों हुए कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘किसानों की वर्षों से कुछ मांगें थीं और उन्हें पूरा करने के लिए हर राजनीतिक दल ने कभी न कभी वादा किया था, लेकिन वे कभी पूरी नहीं हुईं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘संसद ने काफी विचार-विमर्श के बाद कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप दिया। इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार और अवसर भी मिले हैं। इन अधिकारों ने बहुत कम समय में किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है।’’

गौरतलब है कि संसद द्वारा मॉनसून सत्र में पारित तीन कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद कानूनों के रूप में इन्हें लागू किया जा चुका है, जिनका कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं और अनेक किसान, मुख्य रूप से पंजाब के किसान सड़कों पर उतर आए हैं।

नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए बहुत से किसान उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में एक मैदान में जमा हुए हैं।

केंद्र सरकार ने किसानों से बात करने की इच्छा प्रकट करते हुए उनसे संपर्क साधा है। सरकार ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और सरकारी मंडियों की व्यवस्थाएं यथावत रहेंगी, जिन मुद्दों पर किसान संगठन चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी क्षेत्र में लोगों के लिए ‘सही जानकारी रखना और अफवाहों तथा किसी भी प्रकार के संशय से दूर रहना’ एक बड़ी ताकत होती है। उन्होंने खेती के क्षेत्र में अभिनव प्रयोग कर रहे कुछ किसानों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।

प्रथम सिख गुरु नानक देव की जयंती से एक दिन पहले आकाशवाणी के इस कार्यक्रम का प्रसारण ऐसे समय में किया गया जब पंजाब का कृषक समुदाय आंदोलन कर रहा है।

मोदी ने कहा, ‘‘मुझे महसूस होता है कि, गुरु साहब की मुझ पर विशेष कृपा रही जो उन्होंने मुझे हमेशा अपने कार्यों में बहुत करीब से जोड़ा है।’’

गुरु नानक देव की 550वीं जयंती से एक दिन पहले देशवासियों को गुरु पर्व की बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष गुरु तेग बहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व भी है।

मोदी ने कहा, ‘‘मैं, इस बात के लिए बहुत कृतज्ञ हूँ कि गुरु साहिब ने मुझसे निरंतर सेवा ली है। पिछले वर्ष नवंबर में ही करतारपुर साहब कॉरिडोर का खुलना बहुत ही ऐतिहासिक रहा। इस बात को मैं जीवनभर अपने हृदय में संजोकर रखूंगा। यह, हम सभी का सौभाग्य है कि, हमें श्री दरबार साहिब की सेवा करने का एक और अवसर मिला।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दुनियाभर में सिख समुदाय ने गुरु नानक देव जी की प्रेरणा से शुरू की गई लंगर की परंपरा को कोरोना वायरस महामारी के समय में जारी रखकर मानवता की सेवा की है।’’

मोदी ने कच्छ के एक गुरुद्वारे का भी जिक्र किया, जिसे बहुत विशेष माना जाता है। साल 2001 के भूकंप में क्षतिग्रस्त हुए इस गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण गुजरात सरकार ने सिख समुदाय के सहयोग से किया था।

उस दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

उन्होंने कहा कि लखपत गुरुद्वारा के संरक्षण के प्रयासों को 2004 में यूनेस्को एशिया प्रशांत धरोहर पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया।

‘मन की बात’ में अपने करीब आधे घंटे के संबोधन में प्रधानमंत्री ने विभिन्न विषयों पर बात की।

उन्होंने देशवासियों को बताया कि 1913 के आसपास वाराणसी के एक मंदिर से चुराई गई देवी अन्नपूर्णा की प्राचीन प्रतिमा को कनाडा से भारत वापस लाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा की तरह ही अंतरराष्ट्रीय गिरोहों ने हमारी अनेक अमूल्य धरोहरों को लूटा है। ये गिरोह इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत अधिक दाम में बेच देते हैं। अब न केवल उन पर कड़े प्रतिबंध लगाये जा रहे हैं, बल्कि भारत ने ऐसी धरोहरों की वापसी के प्रयास भी बढ़ा दिये हैं।’’

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने शिक्षण संस्थानों से नई, नवोन्मेषी पद्धतियां अपनाने और पूर्व छात्रों को जोड़ने के लिहाज से रचनात्मक मंच तैयार करने को कहा। उन्होंने पूर्व छात्रों से भी अपने संस्थानों के लिए कुछ करते रहने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में कोविड-19 का पहला मामला लगभग एक साल पूर्व सामने आया था। उन्होंने कहा कि इस महामारी के प्रति किसी भी तरह की अनदेखी बहुत गंभीर साबित हो सकती है और लोगों को पूरी ताकत के साथ इसका मुकाबला करते रहना चाहिए।

आगामी छह दिसंबर को डॉ बी आर आंबेडकर की पुण्यतिथि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संविधान में निर्दिष्ट कर्तव्यों का पालन करने और देश के प्रति अपने दायित्वों को याद करने का अवसर है।

मोदी ने अपने कार्यक्रम में जानेमाने पर्यावरणविद् डॉ सालिम अली को भी याद किया और कहा कि पक्षी प्रेमियों के बीच वह हमेशा प्रशंसा का पात्र रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही संग्रहालयों और पुस्तकालयों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘आज देश में कई संग्रहालय और पुस्तकालय अपने संग्रह को पूरी तरह से डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में लगभग 10 डिजिटल दीर्घाएं शुरू करने का काम चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड के हैमिल्टन वेस्ट से सांसद गौरव शर्मा के संस्कृत में शपथ लेने पर उनकी प्रशंसा की।

मोदी ने कहा कि आगामी पांच दिसंबर को श्री अरविंद की पुण्यतिथि है।

उन्होंने कहा, ‘‘महर्षि अरविंद के स्वदेशी के दर्शन ने हमें आगे का मार्ग दिखाया और लोगों को उनके विचारों का अध्ययन करना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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