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भारत के A-SAT परीक्षण को नासा ने बताया 'भयानक', कहा- 'स्पेस स्टेशन के लिए खतरा बढ़ा'

By विनीत कुमार | Updated: April 2, 2019 09:15 IST

नासा की ओर से कहा गया कि भारत के A-SAT परीक्षण के बाद टुकड़ों के स्पेस स्टेशन से टकराने की आशंका 44 फीसदी बढ़ गई है।

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अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने पिछले हफ्ते भारत की ओर से A-SAT परीक्षण को 'खराब और भयानक' करार दिया है। नासा के अनुसार भारत के इस परीक्षण से अंतरिक्ष में मारे गये उपग्रह के मलबे के करीब 400 टुकड़े फैल गये हैं जिससे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए नया खतरा पैदा हो गया है।

यह बात नासा की ओर से जिम ब्रिडेनस्टाइन ने कही है। जिम नासा के प्रमुख हैं। नासा के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत के इस टेस्ट को लेकर यह बात कही। जिम ने कहा, 'कई टुकड़े इतने बड़े नहीं हैं कि उन्हें ट्रैक किया जा सके। हम जो अभी देख पा रहे हैं, उसमें वही हैं जिन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। हम कम से कम 10 सेंटीमीटर या उससे बड़े टुकड़े की बात कर रहे हैं, करीब 60 टुकड़ों को ट्रैक कर लिया गया है।'

भारत की ओर से परीक्षण के दौरान जिस सैटेलाइट को गिराया गया उसे निचली कक्षा में करीब 300 किलोमीटर की दूरी से मारा गया था। यह जगह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन और कक्षा में घूम रहे दूसरे उपग्रहों से काफी नीचे है। हालांकि, जिम ने कहा कि इसमें से करीब 24 टुकड़े स्पेस स्टेशन से ऊपर चले गए हैं।

जिम ने कहा, यह बहुत भयानक भयानक बात है कि ऐसा कोई काम किया गया जिसके टुकड़े अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से ऊपर चले गये हैं। इस तरह की गतिविधि मानव के अंतरिक्ष यान के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। यह स्वीकर करने लायक नहीं है और नासा को बहुत साफ तरीके से समझना होगा कि इसका उस पर क्या असर पड़ने वाला है।'

बता दें कि अमेरिकी सेना स्पेस में उन वस्तुओं को ट्रैक करती रहती है जिनका स्पेस स्टेशन से टकराने का खतरा बना रहता है। अब तक 10 सेंटिमीटर से बड़ी करीब 23,000 चीजें ट्रैक की जा चुकी हैं। इसमें 10,000 तो स्पेस में मौजूद मलबे ही हैं जिसमें 3000 टुकड़े 2007 में चीन के A-SAT परीक्षण के दौरान पैदा हुए थे।

जिम ने कहा कि ऐसे में भारत के परीक्षण के बाद टुकड़ों के स्पेस स्टेशन से टकराने की आशंका 44 फीसदी बढ़ गई है। जिम ने साथ ही कहा कि हालांकि, जैसे-जैसे मलबा वायुमंडल में प्रवेश करेगा वैसे-वैसे खतरा कम होता जाएगा।

टॅग्स :नासाभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
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