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संसदीय समिति की बैठकों में आधे से ज्यादा सदस्य रहे नदारद, इन मांगो को लेकर हुई थी बैठक

By भाषा | Updated: March 7, 2020 20:25 IST

राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार उच्च सदन की आठ संसदीय समितियों में तृणमूल कांग्रेस के 57 प्रतिशत, भाजपा के 36 प्रतिशत और कांग्रेस के 15 प्रतिशत सदस्यों ने किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया।

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ठळक मुद्देइस मामले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी समिति की बैठकों में 29 में से सिर्फ आठ सदस्य ही सभी बैठकों से नदारद रहे। कार्मिक, जनशिकायत और विधि एवं न्याय संबंधी 28 सदस्यीय समिति के नौ और उद्योग संबंधी 31 सदस्यीय समिति के दस सदस्य सभी बैठकों से गैरहाजिर रहे।

नयी दिल्ली: संसदीय समितियों की बैठकों में सत्ता पक्ष और विपक्ष सहित लगभग सभी दलों के आधे से ज्यादा सदस्य शामिल ही नहीं होते हैं। शून्य उपस्थिति वाले सदस्यों में बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, भाजपा की रूपा गांगुली और राजीव प्रताप रूढ़ी सहित दर्जन भर सदस्य शामिल हैं। विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित संसद के दोनों सदनों की समितियों की अनुदान की मांगों को लेकर हुयी बैठकों के ब्योरे पर आधारित रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार उच्च सदन की आठ संसदीय समितियों में तृणमूल कांग्रेस के 57 प्रतिशत, भाजपा के 36 प्रतिशत और कांग्रेस के 15 प्रतिशत सदस्यों ने किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इन दलों के अलावा सदन में अन्य दलों के भी 50 प्रतिशत सदस्य समिति की सभी बैठकों से नदारद रहे। समितियों की सभी बैठकों से नदारद रहने वालों में बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, जदयू के आरसीपी सिंह और भाजपा की रूपा गांगुली सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने बजट सत्र के दूसरे चरण की बैठक दो मार्च को शुरु होने पर भी उच्च सदन में संसदीय समितियों की बैठकों का रिपोर्ट कार्ड सदन में पेश करते हुए इनमें सदस्यों की गैरहाजिरी पर चिंता जताई थी। नायडू ने अनुदान की मांगों पर विचार करने के लिये आहूत संसदीय समितियों की बैठकों में सदस्यों की भागीदारी के रिपोर्टकार्ड प्रत्येक सदस्य को अवगत कराने की बात कही थी। राज्यसभा की आठ समितियों में दोनों सदनों के कुल 243 सदस्य हैं। इनमें से 95 सदस्य (39 प्रतिशत) राज्यसभा के हैं।

अनुदान की मांगों को लेकर हुयी स्थायी समितियों की बैठकों के सभापति को सौंपे गए ब्योरे के अनुसार विज्ञान और प्रौद्योगिकी और वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति की बैठकों में सर्वाधिक सदस्य गैरहाजहिर रहे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी समिति के 31 में से 18 और वाणिज्य संबंधी समिति के 31 में से 17 सदस्य एक भी बैठक में शामिल नहीं हुए। इस मामले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी समिति की बैठकों में 29 में से सिर्फ आठ सदस्य ही सभी बैठकों से नदारद रहे। जबकि कार्मिक, जनशिकायत और विधि एवं न्याय संबंधी 28 सदस्यीय समिति के नौ और उद्योग संबंधी 31 सदस्यीय समिति के दस सदस्य सभी बैठकों से गैरहाजिर रहे।

राज्यसभा की आठ समितियों में शामिल सदस्यों में उच्च सदन के 23 और लोकसभा के 72 सदस्य एक भी बैठक में नहीं आए। गृह मंत्रालय संबंधी समिति के सदस्य एसआर बालासुब्रमण्यम, आरसीपी सिंह और सतीश चंद्र मिश्रा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय संबंधी समिति के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन, कार्मिक, जनशिकायत और कानून मंत्रालय संबंधी समिति के सदस्य माजिद मेमन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय संबंधी समिति के सदस्य अनिल बलूनी और वंदना चव्हाण, पर्यटन एवं परिवहन मंत्रालय संबंधी समिति की सदस्य सोनल मानसिंह, वाणिज्य मंत्रालय संबंधी समिति की सदस्य रूपा गांगुली और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय संबंधी समिति की सदस्य कहकंशा परवीन सभी बैठकों से नदारद रहने वाले राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं। वहीं, लोकसभा सदस्य राजीव प्रताप रूढ़ी, सुखबीर सिंह बादल, असदुद्दीन ओबेसी, नकुल नाथ, मिमी चक्रवर्ती और अनंत कुमार हेगड़े भी इन बैठकों से दूरी बनाने वाले सदस्यों में शामिल हैं। 

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