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मोदी ने ‘आंदोलनजीवी’ टिप्पणी की आलोचना के बाद किसान आंदोलन को पवित्र बताया: किसान नेता राजेवाल

By भाषा | Updated: February 11, 2021 20:54 IST

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जगरांव (लुधियाना), 11 फरवरी किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ‘आंदोलनजीवी’ टिप्पणी के लिए आलोचना का सामना करने के बाद नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को ‘‘पवित्र’’ कहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को लोकसभा में कहा था कि वह किसानों के आंदोलन को ‘‘पवित्र’’ मानते हैं और केंद्र के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए उनसे एक नई अपील की है। दो दिन पहले, राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान मोदी ने एक के बाद एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वालों पर निशाना साधने के लिए ‘आंदोलनकारी’ और ‘आंदोलनजीवी’ के बीच अंतर करने का प्रयास किया था।

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों तथा पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर कानूनों का विरोध कर रहे किसान यूनियनों ने ‘आंदोलनजीवी’ टिप्पणी की आलोचना की थी।

भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के अध्यक्ष राजेवाल ने लुधियाना के जगरावं में ‘किसान महापंचायत’ को संबोधित करते हुए कहा कि ‘काले’ कृषि कानून किसान समुदाय को बर्बाद कर देंगे। यह पंजाब में आयोजित होने वाली पहली ऐसी किसान महापंचायत थी।

हाल ही में, पड़ोसी राज्य हरियाणा में कानूनों के खिलाफ कई 'महापंचायतें' आयोजित की गई और इनमें से तीन को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने संबोधित किया, जो गत दो महीने से किसानों के साथ दिल्ली-उत्तर प्रदेश गाजीपुर सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

राजेवाल ने सोमवार को संसद में मोदी के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘आज उन्होंने (मोदी) कहा कि यह एक ‘पवित्र आंदोलन है। उन्होंने इससे पहले ही आपको परजीवी कहा था। उन्होंने कहा था कि उन्हें विरोध प्रदर्शन करने की आदत है। लेकिन जब इसकी (टिप्पणी) सभी जगह आलोचना हुई तो उन्होंने कहा कि यह एक ‘पवित्र आंदोलन' है।’’

राज्यसभा में मोदी ने आंदोलनजीवियों का नया प्रकार सामने आने की आलोचना की थी जो हर आंदोलन में देखे जा सकते हैं।

'महापंचायत' में राजेवाल ने दावा किया कि उन्होंने कई प्रधानमंत्रियों से मुलाकात की है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लेकिन मैं आज के प्रधानमंत्री को सबसे बड़ा 'ड्रामेबाज' और सबसे बड़ा झूठा पाता हूं।’’

कृषि कानूनों की आलोचना करते हुए राजेवाल ने कहा कि कानून पूरी तरह से "गलत" हैं।

बीकेयू (राजेवाल) अध्यक्ष ने दावा किया कि कृषि राज्य का विषय होने के बावजूद केंद्र इन कृषि कानूनों को लेकर आया।

उन्होंने दावा किया कि इन कानूनों को "व्यापार" करने और कॉर्पोरेट घरानों को खुश करने के लिए तैयार किया गया है, न कि किसानों के लिए।

राजेवाल ने कहा कि कृषि आंदोलन एक "जन आंदोलन" बन गया है।

हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर इन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

हालांकि, सरकार का कहना है कि नए कानून किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगे और कृषि में नई तकनीकों की शुरूआत करेंगे।

राजेवाल ने कहा कि उन्हें संदेह है कि ये नए कृषि कानून किसानों को एक निश्चित अवधि के बाद निजी कंपनियों की "दया" पर छोड़ देंगे क्योंकि सरकारी मंडियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र से कहा गया है कि ये कानून सरकारी मंडियों को नष्ट कर देंगे और कॉर्पोरेट निजी 'मंडियों' की स्थापना करेंगे और फिर लोगों को "लूटेंगे।’’

राजेवाल ने कहा कि एक बार सरकारी मंडियां बंद होने के बाद किसान अपने विपणन योग्य अधिशेष को नहीं बेच पाएंगे। उन्होंने किसानों से अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाये रखने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘संघर्ष लंबा हो सकता है। लेकिन अगर हम शांतिपूर्ण और अहिंसक रहेंगे, तो हम निश्चित रूप से जीतेंगे।’’

बीकेयू (एकता उग्राहन) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहन ने भी केंद्र पर "किसान विरोधी" कानून लाने के लिए निशाना साधा और लोगों से "लंबी लड़ाई" की तैयारी करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने कभी भी सरकार से अनुबंध खेती, वैकल्पिक विपणन जैसे एहसानों के लिए नहीं कहा था। उन्हें लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।’’

उग्राहन ने कहा कि सरकार किसानों पर कृषि प्रणाली का ‘‘विश्व स्तर पर असफल मॉडल’’ थोपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 80 प्रतिशत से अधिक किसान, विशेष रूप से छोटे कृषक, कानूनों के कारण कार्पोरेट्स के प्रति अपनी जमीन खो देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम इन कानूनों को लागू नहीं होने देंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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