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मराठा क्रांति मोर्चा का आरक्षण के लिए किया जा रहा आंदोलन खत्म, शिव सेना विधायक ने स्पीकर को भेजा इस्तीफा

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: July 25, 2018 18:52 IST

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "सरकार ने मराठा समुदाय की माँगों का संज्ञान लेते हुए कई फैसले किए। सरकार उनसे बात करने को तैयार है। सरकार ने मराटा समुदाय को आरक्षण देने के लिए कानून भी बनाया था लेकिन उस पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने रोक लगा दी।" 

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मुंबई, 25 जुलाई: शिव सेना के विधायक हर्षवर्धन जाधव ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर विधान सभा अध्यक्ष को इस्तीफा भेजा है। औरंगाबाद के कन्नड़ से विधायक जाधव ने कहा है कि उन्होंने अभी ईमेल से अपना इस्तीफा भेजा है और जल्द ही वो उसकी मूल प्रति भी विधान सभा स्पीकर से मिलकर उन्हें सौंपेंगे। मराठाआों को सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण दिए जाने को लेकर सोमवार (23 जुलाई) से शुरू हुआ आंदोलन बुधवार को समाप्त हुआ। मराठा क्रांति मोर्चा द्वारा बुधवार को आयोजित मुंबई बन्द को वापस लेने के बाद ठाणे और वासी के बीच ट्रांस-हार्बर लाइन लोकल ट्रेन सेवा दोबारा शुरू हो चुकी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों की माँग का संज्ञान लिया है लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा लगायी गये स्थगन आदेश की वजह से उसका फैसला अधर में लटक गया।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "सरकार ने मराठा समुदाय की माँगों का संज्ञान लेते हुए कई फैसले किए। सरकार उनसे बात करने को तैयार है। सरकार ने मराटा समुदाय को आरक्षण देने के लिए कानून भी बनाया था लेकिन उस पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने रोक लगा दी।"  मराठा क्रांति मोर्चा ने मंगलवार (24 जुलाई) को महाराष्ट्र बन्द और बुधवार को मुंबई बन्द का आह्वान किया था। संगठन द्वारा बन्द वापस लेने की घोषणा के बाद कलंनबोली हाईवे सात घण्टे बाद खुला। पुलिस ने हाईवे खुलवाने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े। बन्द वापस लेने के बाद भी हाईवे पर कुछ आंदोलनकारी मौजूद हैं।

 

मराठा क्रांति मोर्चा के बन्द के दौरान मंगलवार को कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुईं। की थी। राज्य में कई जगहों पर आगजनी, पत्‍थरबाजी और सामुदायिक हिंसा की घटनाएँ दर्ज की गयीं। बन्द के दौरान स्कूल, कॉलेजों और दूध के वाहन इत्यादित जरूरी चीजों के ले जाने वाले वाहनों को बन्द से बाहर रखा गया था। 

प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए पथराव में पुलिस कांस्टेबल की मौत के बाद मामले ने संगीन मोड़ ले लिया। दो प्रदर्शनकारियों ने खुदकुशी करने की भी कोशिश की। नौ प्रदर्शनकारी घायल हो गये। प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में आग लगा दी।  इससे पहले सोमवार को भी एक प्रदर्शनकारी एक स्थानीय नदी में कूद गया था जिससे उसकी मौत हो गयी थी। महाराष्ट्र में करीब 30 प्रतिशत मराठा हैं। मराठा क्रांति मोर्चा ने पिछले साल भी समुदाय को आरक्षण दिये जाने की माँग को लेकर राज्यव्यापी प्रदर्शन किये थे।

प्रदर्शनकारियों ने मराठा संगठनों की ओर से आयोजित बंद के दौरान मुंबई और इससे सटे ठाणे जिले सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बसों पर हमला किया , आगजनी की और लोकल ट्रेनों पर पत्थर फेंके। मराठा संगठनों ने नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की अपनी मांग को लेकर बंद आयोजित किया था। पथराव में एक पुलिस अधीक्षक सहित तीन पुलिसकर्मी जख्मी हुए। मोर्चा के नेता वीरेंद्र पवार ने यहां पत्रकारों को बताया , ‘‘ हम सिर्फ यह साबित करना चाहते थे कि हम एकजुट हैं और हमने इसे साबित भी किया। हम नहीं चाहते थे कि प्रदर्शन हिंसक हो जाए। इसलिए हम आज मुंबई में अपना बंद खत्म कर रहे हैं। ’’  पवार ने कहा , ‘‘ हमें संदेह है कि कुछ लोगों ने राजनीतिक मंशा से हिंसक गतिविधियां की। वरना , इसे पहले ही तरह ही शांतिपूर्ण होना था। लेकिन मुंबई के बाहर से हिंसा की खबरें आने के बाद हमने इसे खत्म करने का फैसला किया। ’’ मोर्चा के एक अन्य नेता ने कहा कि नौ अगस्त को फिर से बंद आयोजित किया जा सकता है , लेकिन इस बाबत अंतिम फैसला सभी मराठा मोर्चों के सभी वरिष्ठ सदस्यों से विचार - विमर्श के बाद ही किया जाएगा। महाराष्ट्र में करीब 30 प्रतिशत की आबादी वाला मराठा समुदाय राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली समुदाय है और वह नौकरियों एवं शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहा है। इससे पहले , समुदाय के सदस्यों ने अपनी मांगों के समर्थन में विभिन्न जिलों में कई रैलियां की थी। पिछले साल मुंबई में मराठा क्रांति मोर्चा ने इस सिलसिले में एक विशाल रैली आयोजित की थी।बीते रविवार को काकासाहेब शिंदे नाम का एक 27 वर्षीय प्रदर्शनकारी औरंगाबाद की गोदावरी नदी में एक पुल से कूद गया था और उसकी मौत हो गई थी। शिंदे की मौत के बाद प्रदर्शन और तेज हो गए थे। कल जगन्नाथ सोनावने नाम के एक शख्स ने औरंगाबाद में प्रदर्शन के दौरान कोई जहरीली चीज खा ली थी। आज एक स्थानीय सरकारी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। मराठा क्रांति मोर्चा ने बंद का आह्वान किया था। मोर्चा ने मांग की थी कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अपनी इस कथित टिप्पणी के लिए माफी मांगें कि समुदाय के कुछ सदस्य शोलापुर जिले के पंढरपुर कस्बे में हिंसा की योजना बना रहे हैं। सोमवार को फडणवीस को ‘ आषाढ़ी एकादशी ’ के अवसर पर एक मंदिर में पूजा करनी थी , लेकिन जब मराठा संगठनों ने उनके कार्यक्रम को बाधित करने की धमकी दी तो उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। पवार ने कहा , ‘‘ हमें सरकार को जो कुछ भी बताना था , वह हमने कर दिया है। लेकिन हम पिछले दो साल में सरकार के रुख से निराश हैं। ’’ प्रदर्शन के नेता ने कहा कि सरकार का एक भी प्रतिनिधि प्रदर्शनकारियों से बात करने नहीं आया। मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए पवार ने कहा कि फडणवीस ‘‘ एसी कमरे में बैठे हुए हैं ’’ और उन्होंने ‘‘ हमारी मांगें पूरी करने की कोई चिंता नहीं की। ’’ बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कुछ लोकल ट्रेनों और बसों पर पत्थर फेंके और बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) की एक बस को आग के हवाले कर दिया। बेस्ट के प्रवक्ता हनुमंत गोफाने ने कहा , ‘‘ दोपहर एक बजे तक पत्थरबाजी में तीन बसें क्षतिग्रस्त हुईं और टायरों से हवा निकालकर नौ बसों को क्षतिग्रस्त किया गया। ’’ दोपहर करीब डेढ़ बजे प्रदर्शनकारियों ने एक बस को आग के हवाले कर दिया। बाद में फायर ब्रिगेड ने आग बुझाई। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनों के कारण लोकल नेटवर्क के एक खंड पर ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई। एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल सतारा में पत्थरबाजी की चपेट में आने से मामूली तौर पर घायल हुए। नवी मुंबई के कलामबोली में भी दो अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए। 

(भाषा से इनपुट के साथ)

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