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मणिपुर घटना: 11 दिन की पुलिस हिरासत में भेजे गए चारों आरोपी, 20 जुलाई को हुई थी गिरफ्तारी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 21, 2023 21:24 IST

मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में भीड़ में शामिल रहे गिरफ्तार चारों आरोपियों को शुक्रवार को 11 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।

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ठळक मुद्देमणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की घटना सामने आई थी गिरफ्तार चारों आरोपियों को शुक्रवार को 11 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गयाये गिरफ्तारियां 20 जुलाई को की गई थीं

इंफाल: मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में भीड़ में शामिल रहे गिरफ्तार चारों आरोपियों को शुक्रवार को 11 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। ये गिरफ्तारियां 19 जुलाई को घटना का 26 सेकंड का वीडियो सामने आने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को की गईं।

पुलिस ने बताया कि आक्रोशित भीड़ ने शुक्रवार दोपहर एक अन्य संदिग्ध के थोउबल जिले में वांगजिंग स्थित घर को जला दिया जिसे अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, "संदिग्ध को अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। यह पता चलने पर कि पुलिस उसकी तलाश कर रही है, वह फरार हो गया।" इस मामले के मुख्य आरोपी को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटों बाद बृहस्पतिवार को उसका मकान आग के हवाले कर दिया गया था।

पुलिस ने बताया कि वीडियो में वह बी फाइनोम गांव में भीड़ को निर्देश देते हुए स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वीडियो में दिखने वाली एक महिला एक पूर्व सैनिक की पत्नी है, जिन्होंने असम रेजीमेंट में सूबेदार के तौर पर सेवाएं दीं और करगिल युद्ध भी लड़ा था। घटना के संबंध में शिकायत करीब एक माह पहले 21 जून को कांगपोकपी जिले के सैकुल थाने में दर्ज कराई गई थी।

इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में भीड़ की दरिंदगी का जिक्र किया गया है। प्राथमिकी में दावा किया गया कि भीड़ ने एक व्यक्ति की हत्या कर दी जिसने चार मई को कुछ लोगों को अपनी बहन से दुष्कर्म करने से रोकने की कोशिश की थी। इसके बाद दोनों महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया और दूसरे लोगों के सामने ही उनका यौन उत्पीड़न किया गया।

अरुणाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग ने मणिपुर में हुई चार मई की घटना पर आक्रोश व्यक्त किया। आयोग ने कहा कि यह घटना सभी महिलाओं का अपमान है और दोषियों को मौत की सजा दी जानी चाहिए। मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को आयोजित ‘ट्राइबल सॉलिडारिटी मार्च’ (आदिवासी एकजुटता मार्च) के दौरान हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में अब तक 160 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं तथा कई अन्य घायल हुए हैं। राज्य में मेइती समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नगा और कुकी समुदाय के आदिवासियों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे पर्वतीय जिलों में रहते हैं। 

(भाषा इनपुट)

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