मुंबईः महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने राज्य के शहरी इलाकों में भाजपा के पुनरुत्थान में एक प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उभरते हुए पार्टी को नगर निगम चुनावों में जबरदस्त जीत दिलाई और यह साबित किया कि पार्टी आलाकमान की कम से कम भागीदारी के बावजूद वह ऐतिहासिक जनादेश दिला सकते हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने 15 जनवरी को हुए चुनाव में 29 नगर निगमों में से 25 में जीत हासिल की, जिसमें मुंबई भी शामिल है। पार्टी 17 महानगरपालिकाओं में अपने दम पर महापौर बनाने के लिए तैयार है, जो इसके शहरी जनाधार के विस्तार को दर्शाता है। इन परिणाम को 2024 के अंत में दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनकी प्रमुख चुनावी सफलता मानी जा रही है और इसे उनके नेतृत्व का समर्थन माना जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदर्शन ने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का कद और बढ़ाया
नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदर्शन ने फडणवीस का कद और बढ़ा दिया है क्योंकि इस चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व की न्यूनतम भागीदारी रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस चुनाव से दूर रहकर राज्य नेतृत्व पर पूरी जिम्मेदारी डाली।
फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि लोगों ने भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति को वोट दिया क्योंकि वे ईमानदारी और विकास चाहते हैं। उन्होंने कहा, "भाजपा ने विकास का एजेंडा पेश किया। हमने इसे लोगों के सामने रखा और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। हमने कई नगर निकायों में रिकॉर्ड तोड़ जनादेश प्राप्त किया है। यह दर्शाता है कि लोग ईमानदारी और विकास चाहते हैं।
सोलापुर में फडणवीस ने पहली बार के विधायक देवेंद्र कोटे को जिम्मेदारी दी
यही कारण है कि लोगों ने भाजपा को वोट दिया।” फडणवीस ने चुनाव अभियान की अगुवाई की, रणनीति बनाई और उम्मीदवारों का चयन किया, जो इस शानदार जीत के लिए निर्णायक साबित हुआ। भाजपा की मुंबई इकाई के प्रमुख अमीत सातम ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के लिए संगठनात्मक समन्वय की जिम्मेदारी ली,
जबकि विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) प्रवीण दरेकर और प्रसाद लाड ने मुंबई के लिए उम्मीदवारों के चयन और प्रचार योजना में निर्णायक भूमिका निभाई। मंत्री गिरीश महाजन ने जलगांव और नासिक में पार्टी के अभियान को सफलतापूर्वक प्रबंधित किया, दोनों नगर निकायों में जीत सुनिश्चित की और सोलापुर में फडणवीस ने पहली बार के विधायक देवेंद्र कोटे को जिम्मेदारी दी।
भाजपा विधायक राहुल आवड़े को इचलकरंजी नगर निगम में जिम्मेदारी सौंपी
बाहरी माने जा रहे कई उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के बावजूद भाजपा को भारी जनादेश मिला, जो प्रचार अभियान की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को कमजोर करने के लिए स्थानीय नेताओं को पार्टी में शामिल करने की रणनीति भी अपनाई। पूर्व कांग्रेस विधायक कुनाल पाटिल (धुले) और कैलास गोरंट्याल (जालना) के भाजपा में शामिल होने से निकाय चुनावों में जीत सुनिश्चित हुई और पहली बार भाजपा विधायक राहुल आवड़े को इचलकरंजी नगर निगम में जिम्मेदारी सौंपी गई।
फडणवीस ने नागपुर महानगरपालिका में भी अपनी पकड़ मजबूत रखी, जिससे उनकी स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई। हालांकि भाजपा अमरावती और चंद्रपुर के नगर निकायों में विफल रही, जहां पर उसने 2017 में जीत हासिल की थी। उसने नांदेड-वाघाला नगर निकाय पर जीत हासिल की।
2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद महत्वपूर्ण
यह जीत पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य अशोक चव्हाण की मदद से हासिल हुई, जिन्होंने पहले कांग्रेस को यहां जीत दिलाई थी। नगर निकाय चुनावों ने फडणवीस की नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक निर्णय क्षमता को उजागर किया है, और ये परिणाम विशेष रूप से 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद महत्वपूर्ण हैं।
फडणवीस ने उस समय अपने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और उनका समर्थन किया। इसके बाद उन्होंने 2024 विधानसभा चुनावों में भाजपा को 288 सदस्यीय विधानसभा में 130 से अधिक सीट पर जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नगर निकाय चुनावों को फडणवीस के नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण परीक्षण माना जा रहा था, और परिणामों ने महाराष्ट्र में भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में उनकी स्थिति को मजबूत किया है।