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महाराष्ट्र: गोंडिया के चावल मिल मालिकों ने धान के आयात पर पाबंदी हटाने की मांग की

By भाषा | Updated: January 3, 2021 19:09 IST

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गोंडिया (महाराष्ट्र), तीन जनवरी महाराष्ट्र के गोंडिया जिले में चावल मिल मालिकों ने आरोप लगाया है कि अन्य राज्यों से धान की ढुलाई पर रोक लगाने के जिला प्रशासन के कदम से कारोबार प्रभावित हुआ है और यह किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य अधिनियम, 2020 के प्रावधानों का उल्लंघन भी है।

इन आरोपों का खंडन करते हुए जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को पीटीआई-भाषा से कहा कि धान के आयात पर पाबंदी स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा एवं मुनाफाखोरी रोकने के लिए लगायी गयी है।

अधिकारी ने महाराष्ट्र सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय की ओर से अन्य राज्यों से गोंडिया में धान की ढुलाई पर पाबंदी लगाते हुए जारी किये गये आदेश का हवाला दिया।

पूर्वी महाराष्ट्र में गोंडिया, भंडारा, गढ़चिरौली, चंद्रपुर और नागपुर जिले बड़े धान उत्पादक क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। इन जिलों में करीब 700 चावल मिलें चल रही हैं और हजारों लोग अपनी आजीविका के लिए इन मिलों पर आश्रित हैं।

महाराष्ट्र सरकार आम श्रेणी के चावल के लिए 1868 रूपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है और उसने प्रति क्विंटल पर 700 रूपये के बोनस की भी घोषणा की है। इस तरह प्रति क्विंटल चावल का दाम 2,568 रूपये हो जाता है।

अधिकारी ने कहा कि उसके विपरीत उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश में धान की दर कम है, ऐसे में गोंडिया और उसके आसपास के जिलों के मिल मालिक सस्ते दाम पर इन राज्यों से धान खरीद रहे हैं और मुनाफा कमाने के लिए किसानों के नाम पर खरीद केंद्रों पर उसे बेच दे रहे हैं।

इस बीच खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आदेश के बाद गोंडिया जिले की सीमाओं पर धान से लदे सैंकड़ों ट्रक रोक दिए गये हैं।

राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशसन ने इस पाबंदी आदेश की गलत व्याख्या की है जो किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं प्रोत्साहन) अधिनियम, 2020 एवं कारोबार सुगमता नीति का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि धान गोंडिया के सरकारी खरीद केंद्रों पर ले जाकर मुनाफा कमाने के लिए नहीं बल्कि मिलों के लिए लाया जा रहा है।

इस संबंध में संपर्क किये जाने जिला आपूर्ति अधिकारी देवराव वानखेडे ने कहा, ‘‘ हमें शिकायतें मिलीं कि एमएसपी का फायदा उठाने के लिए धान सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचा जा रहा है, जिसके बाद हमने अन्य राज्यों से धान के आयात पर रोक लगा दी। चावल मिल मालिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धान को इन केंद्रों पर नहीं ले जाया जाए। उल्लंघनकर्ताओं को कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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