इंदौर: मध्य प्रदेश अब चीतों के 'पुनरुद्धार' का मुख्य केंद्र बन रहा है। भारतीय मूल की 25 माह आयु की मादा चीता 'गामिनी' ने कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगलों में चार स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है, जो राज्य की धरती चीतों के वंश विस्तार के लिए पूरी तरह अनुकूल होने का जीता-जागता प्रमाण है। यह सफलता प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति मध्य प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत 2022 से अब तक विदेशी धरती (नामीबिया से 8, दक्षिण अफ्रीका से 12, तथा फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 9) से कुल 29 चीते कूनो नेशनल पार्क लाए जा चुके हैं। वर्तमान में कुनो में चीता की आबादी 50 से अधिक हो चुकी है। अभी तक लगभग 33 चीता शावकों का जन्म हो चुका है, जिनमें से कई जीवित हैं।
केंद्रीय वन्यजीव प्रबंधन प्राधिकरण (NTCA) के तहत चल रहे प्रोजेक्ट चीता के तहत 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए आठ चीतों में से 'गामिनी' एक है। यह पहली बार है जब किसी आयातित चीते ने भारत में प्राकृतिक आवास में शावकों को जन्म दिया हो। वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने बताया कि मादा चीता ने पिछले सप्ताहांत में जंगल के एक घने इलाके में शावकों को जन्म दिया, और मां-शावक सभी स्वस्थ हैं। कैमरा ट्रैप के माध्यम से इस घटना की पुष्टि हुई है।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने शनिवार को कहा, "यह ऐतिहासिक क्षण है। कूनो नेशनल पार्क अब चीतों के लिए आदर्श निवास सिद्ध हो रहा है। हमारी टीम की निगरानी और संरक्षण प्रयास सफल हो रहे हैं।" उन्होंने कूनो के प्रबंधकों और वन्यजीव चिकित्सकों को बधाई दी।
प्रोजेक्ट चीता के समन्वयक डॉ. यूपीएस सिंह ने बताया, "गामिनी ने 17 महीने की आयु में ही प्रजनन शुरू कर दिया, जो चीतों की प्राकृतिक क्षमता को दर्शाता है। ये शावक यदि जीवित रहे, तो चीता आबादी में तेजी से वृद्धि होगी।" उन्होंने कहा कि राज्य में चीतों के लिए 748 वर्ग किलोमीटर का विशेष क्षेत्र विकसित किया गया है, जहां कोई मानवीय गतिविधि नहीं होती।
वन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता मध्य प्रदेश को चीता संरक्षण का हब बना सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि शावकों को प्राकृतिक खतरे जैसे शेर या बीमारी का सामना करना पड़ सकता है। कूनो प्रशासन ने शावकों की निगरानी के लिए ड्रोन और रेडियो कॉलर का उपयोग तेज कर दिया है।
भारत में चीता 1952 में विलुप्त हो गया था। प्रोजेक्ट चीता के तहत अब तक 20 से अधिक चीते कूनो में पुनर्वासित हो चुके हैं, जिनमें से कुछ ने पहले भी शावक दिए हैं। यह घटना न केवल जैव विविधता संरक्षण में मील का पत्थर है, बल्कि पर्यावरणीय पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।