Lok Sabha Elections 2019: Rajasthan's 'Hot Seat' will be a tough fight for Barmer! | लोकसभा चुनाव 2019: राजस्थान की ‘हॉट सीट’ बाड़मेर में कड़े मुकाबले के आसार!
मानवेंद्र सिंह भाजपा के कद्दावर नेता जसवंत सिंह के बेटे हैं और इस सीट से एक बार सांसद रह चुके हैं।

Highlightsबाड़मेर सीट पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस व भाजपा दोनों के ही उम्मीदवार हालिया विधानसभा चुनाव में अलग अलग सीटों पर हार गए थे।भाजपा ने जहां जातीय समीकरणों का फायदा उठाने के लिए एक बार फिर जाट उम्मीदवार को मैदान में उतारा हैकांग्रेस ने 'प्रतिबद्धता' को पूरा करने के लिए मानवेंद्र सिंह को टिकट दी है

राजस्थान के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्रों में से एक बाड़मेर सीट पर तय हो गया है कि कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह जसोल का मुकाबला भाजपा के कैलाश चौधरी से होगा। जहां बर्खास्त आईपीएस पंकज चौधरी बसपा के टिकट पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश करेंगे।

बाड़मेर सीट पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस व भाजपा दोनों के ही उम्मीदवार हालिया विधानसभा चुनाव में अलग अलग सीटों पर हार गए थे। वहीं पंकज चौधरी का यह पहला चुनाव है। भाजपा ने जहां जातीय समीकरणों का फायदा उठाने के लिए एक बार फिर जाट उम्मीदवार को मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस ने 'प्रतिबद्धता' को पूरा करने के लिए मानवेंद्र सिंह को टिकट दी है जो विधानसभा चुनाव से ठीक पहले न केवल कांग्रेस में शामिल हुए बल्कि झालावाड़ सीट पर वसुंधरा राजे के सामने चुनाव भी लड़ा।

कांग्रेस ने इस तरह से दशकों बाद इस सीट पर किसी राजपूत को अपना उम्मीदवार बनाने का जोखिम उठाया है। बाड़मेर भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पालीवाल कहते हैं, 'जातीय समीकरण साफ तौर पर हमारे पक्ष में हैं। इसके अलावा राजपूतों के भी अच्छे खासे वोट हमें मिलने वाले हैं।' मुद्दा क्या होगा यह पूछे जाने पर पालीवाल कहते हैं,' मुद्दा वही है राष्ट्रवाद व नरेंद्र मोदी को फिर प्रधानमंत्री बनाना।'

वहीं बाड़मेर से कांग्रेस के विधायक मेवाराम जैन स्वाभाविक रूप से इस बात से सहमत नहीं हैं। उन्होंने 'भाषा' से कहा, 'जात वात से फर्क नहीं पड़ने वाला है। बाड़मेर सीट पर तो माहौल कांग्रेस के पक्ष में है और जीत भारी मतांतर से होगी।' मानवेंद्र सिंह भाजपा के कद्दावर नेता जसवंत सिंह के बेटे हैं और इस सीट से एक बार सांसद रह चुके हैं।

भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद कर्नल सोना राम के बजाय कैलाश चौधरी पर भरोसा जताया है। कैलाश 2013 में बायतू से विधायक रहे लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में हरीश चौधरी से हार गए। सोना राम तीन बार कांग्रेस व एक बार भाजपा से सांसद रहे हैं लेकिन उन्होंने दिसंबर में विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गए।

इस सीट पर बसपा ने बर्खास्त आईपीएस पंकज चौधरी को टिकट देकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। चौधरी जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं और उनका मानना है कि वह इलाके की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं और उन्हें सुलझाने की दिशा में काम करना चाहते हैं।

यह लोकसभा क्षेत्र पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दो जिलों के विधानसभा क्षेत्रों तक फैली है और थार के रेतीले धोरों में पसरे इस लोकसभा क्षेत्र में कड़ी गर्मी पड़ती है। इन विधानसभा क्षेत्रों में जैसलमेर, शिव, बाड़मेर, बायतू, पचपदरा, सिवाना, गुडामलानी व चौहटन है। इनमें से सात सीटें इस समय कांग्रेस के पास हैं।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार जहां तक सीट पर जातीय समीकरणों की बात है तो यहां जाट व राजपूत वोटों के अलावा अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या परिणामों को प्रभावित करती है। कांग्रेस ने इस सीट पर बीते कुछ दशकों में पहली बार किसी राजपूत को टिकट दिया है लेकिन देखना यह है कि वह अपनी सर्वसमाज के नेता की छवि के साथ 'जाट ही जीतेगा' के मिथक को तोड़ पाते हैं या नहीं। 


Web Title: Lok Sabha Elections 2019: Rajasthan's 'Hot Seat' will be a tough fight for Barmer!

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