लाइव न्यूज़ :

लोकसभा चुनाव 2019: आतंकियों के चलते अनंतनाग संसदीय सीट पर होंगे तीन चरणों में चुनाव

By सुरेश डुग्गर | Updated: March 11, 2019 10:14 IST

देश में ऐसा पहली बार होगा कि किसी लोकसभा सीट के लिए तीन चरणों में मतदान होगें। ये सीट है जम्मू कश्मीर की अनंतनाग संसदीय सीट। इस संसदीय सीट को महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का गढ़ माना जाता है।

Open in App
ठळक मुद्देदेश में ऐसा पहली बार होगा कि किसी लोकसभा सीट के लिए तीन चरणों में मतदान होगेंइस संसदीय सीट को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का गढ़ माना जाता है।अनंतनाग-पुलवामा संसदीय क्षेत्र के लोग 23 अप्रैल, 29 अप्रैल और 6 मई को मतदान करेंगे।

देश में ऐसा पहली बार होगा कि किसी लोकसभा सीट के लिए तीन चरणों में मतदान होगें। ये सीट है जम्मू कश्मीर की अनंतनाग संसदीय सीट। इस संसदीय सीट को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का गढ़ माना जाता है। अनंतनाग-पुलवामा संसदीय क्षेत्र के लोग 23 अप्रैल, 29 अप्रैल और 6 मई को मतदान करेंगे। इसके लिए संसदीय क्षेत्र को तीन भागों में बांटा जाएगा और सुरक्षा के इंतजाम भी तीन गुना करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग कर दी गई है। निर्वाचन आयोग ने तीन चरणों में चुनाव करवाने का ये अनूठा प्रयोग आतंकवाद के चलते किया है।

अनंतनाग संसदीय सीट का इतिहास

2014 के संसदीय चुनावों में इस सीट पर सिर्फ 27 प्रतिशत मतदान हुआ था जो साल 2009 के संसदीय चुनावों के मुकाबले कम था। महबूबा मुफ्ती ने 4 अप्रैल 2016 को मुख्यमंत्री पद संभाला तो उनकी दिली तमन्ना थी कि इस संसदीय क्षेत्र से परिवारवाद की बेल को बढ़ाई जाए। उन्होंने अपने भाई तस्सदुक मुफ्ती को इस संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा। लेकिन आतंकवाद के चलते सुरक्षा कारणों से इस चुनाव प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा। 2016 से लेकर अब तक इस संसदीय क्षेत्र में मतदान नहीं करवाया जा सका। इसबार निर्वाचन आयोग ने एक नए प्रयोग से चुनाव संपन्न करवाने की कोशिश की है लेकिन रास्ते में आतंकवाद की बड़ी चुनौती खड़ी है।

दक्षिण कश्मीर बना आतंकियों का गढ़

सबसे ज्यादा अशांत दक्षिण कश्मीर क्षेत्र के युवा आतंकी संगठनों से जुड़ रहे हैं। आतंकवाद से जुड़ने वाले अधिकतर युवा दक्षिण कश्मीर के जिले पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग के हैं। जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों में सबसे ज्यादा आतंकी जुड़ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में अभी मुख्य रूप से 10 से ज्यादा आतंकी संगठन सक्रिय हैं। इन पर भारत सरकार ने बैन लगाया हुआ है। 

2018 में मारे गए 311 आतंकी

साल 2016 के बाद से आतंक से जुड़ने वाले कश्मीर के युवाओं की संख्या बढ़ी है। हालांकि सुरक्षा बलों ने इन आतंकियों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। पिछले साल ही 311 आतंकी मारे गए थे। इससे पहले 2017 में 213 जबकि साल 2010 में 232 आतंकियों का खात्मा किया गया था।

युवा चले आतंक के रास्ते

बता दें कि पिछले साल जम्मू कश्मीर में 191 स्थानीय युवा विभिन्न आतंकी संगठनों से जुड़े। इस तरह 2017 की तुलना में 65 और युवाओं ने पिछले साल आतंक का रास्ता अपनाया।

टॅग्स :लोकसभा चुनावजम्मू कश्मीरमहबूबा मुफ़्ती
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारलेह हवाई अड्डाः उड़ान की संख्या 8 से बढ़कर 18 किया?, रिकार्ड संख्या में पर्यटकों के आने के इंतजार में लद्दाख

कारोबारपल-पल बदलते रंग?, मौसम की मार और किसान परेशान?, आखिर क्या करें?

कारोबारदर्द कोई समझे, रील्स से बर्बादी तक?, कैसे पर्यटक और कंटेंट क्रिएटर्स पंपोर सरसों खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान?

कारोबारईरान में फिर से फंसे सैकड़ों कश्मीरी छात्र?, 7 दिन के लिए बंद अजरबैजान सीमा

भारतगंदरबल एनकाउंटर: 7 दिन में रिपोर्ट पेश करो?, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर लिखा

भारत अधिक खबरें

भारतरामअवतार जग्गी हत्याः अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा

भारतबीजेपी 47वां स्थापना दिवस समारोहः करोड़ों कार्यकर्ता को बधाई, हम पार्टी को अपनी मां मानते हैं?, पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा-भावुक पोस्ट, वीडियो

भारतBaramati Bypoll 2026: कौन हैं आकाश मोरे? बारामती उपचुनाव में महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से टक्कर?

भारतअसम की जनता ने इस बार दो काम पक्के किए?, पीएम मोदी बोले- एनडीए की हैट्रिक और कांग्रेस के शाही परिवार के नामदार की हार की सेंचुरी का रिकॉर्ड?

भारतपाकिस्तानी सोशल मीडिया की झूठी जानकारी का इस्तेमाल कर पत्नी पर आरोप, सीएम सरमा ने कहा-फर्जी डॉक्यूमेंट्स के साथ जनता के सामने बात?