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झारखंड में मां व नवजात को खाट पर 7 किमी दूर अस्पताल ले गए रिश्तेदार, डॉक्टर नहीं मिलने से दोनों की मौत

By अनुराग आनंद | Updated: March 1, 2021 12:33 IST

झारखंड में घटी एक घटना ने प्रदेश के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की पोल खोल दी है। यहां अस्पताल पहुंचने के बावजूद डॉक्टर नहीं होने की वजह से मां व नवजात को नहीं बचाया जा सका।

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ठळक मुद्देअस्पताल पहुंचने के बाद भी वहां डॉक्टर नहीं होने की वजह से मां व नवजात को परिवार के लोग बचा नहीं सके।झारखंड के गिरिडीह जिले में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर एक 20 वर्षीय महिला और उसके नवजात की मौत हो गई।

रांची: 21वीं सदी के इस भारत में एक गांव ऐसा भी है, जहां वाहनों के जाने-आने लायक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है और यातायात के साधनों का आभाव है। इस गांव के लोग आज भी परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर मरीजों को खाट पर टांगकर करीब 7 किमी दूर अस्पताल ले जाने के लिए बाध्य हैं। झारखंड के गिरिडीह जिला अंतर्गत तीसरी बरदौनी नाम के इस गांव से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस गांव में वाहन चलने योग्य सड़क नहीं होने व यातायात की सुविधा के आभाव में प्रेग्नेंसी के दौरान इमरजेंसी में एक महिला को खाट पर लेकर सात किलोमीटर तक पैदल चलकर उसके रिश्तेदार अस्पताल पहुंचे। लेकिन, अस्पताल पहुंचने के बाद भी वहां डॉक्टर नहीं होने की वजह से मां व नवजात को परिवार के लोग बचा नहीं सके।

डॉक्टर के अस्पताल में नहीं होने पर महिला व नवजात की हो गई मौत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के गिरिडीह जिले के गवन ब्लॉक में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर एक 20 वर्षीय महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई, जहां घटना के समय कोई भी डॉक्टर नहीं था। इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर व आयुष प्रैक्टिशनर की ड्यूटी लगती है, लेकिन दुर्भाग्यवश घटना के समय दोनों में से कोई भी मौके पर मौजूद नहीं था। 

मरने वाली महिला टिसरी बरदौनी गांव के लक्ष्मीबथान कॉलोनी में अपने पति सुनील टुडू के साथ रहती थी। महिला का नाम सुरजा मरांडी था। सुरजा ने गुरुवार सुबह एक बच्चे को जन्म दिया। क्षेत्र की बीडीओ मधु कुमारी ने कहा कि एक दाई की मौजूदगी में गुरुवार सुबह एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन दाई अपरा को नहीं हटा सकी और खून बहना जारी रहा। इसके बाद परिवार के लोगों ने तुरंत महिला को अस्पताल ले जाने का फैसला लिया और वह महिला को खाट पर लिटाकर 7 किमी पैदल चलकर अस्पताल गए।  

सीएचसी में 6 डॉक्टरों की जरूरत है, लेकिन यहां एमबीबीएस डॉक्टर केवल दो हैं: बीडीओ

बता दें कि जब महिला शाम के करीब 5 बजे के आसपास अस्पताल पहुंची, तो डॉक्टर कथित रूप से अस्पताल में नहीं थे। बीडीओ मधु कुमारी ने कहा कि आयुष चिकित्सक सर्जरी करने के बाद दोपहर के भोजन के लिए गए थे। महिला की अस्पताल के फाटक पर ही मृत्यु हो गई और बच्चे का पहले ही निधन हो गया था।

मधु कुमारी ने कहा कि सीएचसी में छह डॉक्टरों की जरूरत है। लेकिन, यहां एमबीबीएस डॉक्टर केवल दो हैं। बीडीओ ने कहा कि घटना वाले दिन एक डॉक्टर प्रशिक्षण में था, दूसरे ने बिना किसी सूचना के छुट्टी ले ली। इसके अलावा, पिछले साल दो डॉक्टर ज्वाइन किया लेकिन कार्यभार संभालने से पहले नौकरी छोड़ दिया था।

टॅग्स :झारखंडडॉक्टरगिरिडीहप्रेगनेंसी
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