लाइव न्यूज़ :

रमजान: जम्मू-कश्मीर पुलिस का ‘अघोषित एकतरफा’ सीजफायर!, किया दावा- टूट चुकी है आतंकवाद की कमर

By सुरेश डुग्गर | Updated: May 11, 2019 09:47 IST

जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार आतंकियों का मनोबल इस समय बहुत ही गिरा हुआ है और कश्मीर में गिनती के आतंकी बचे हुए हैं। उनके मुताबिक, पिछले 4 माह में 80 से अधिक आतंकियों को ढेर कर उनकी कमर तोड़ दी गई है।

Open in App
ठळक मुद्देरमजान धार्मिक रूप से मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र महीना होता है। रमजान में मुस्लिम रोजा रखते हैं।केंद्र या राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर सीजफायर की घोषणा नहीं की है।

जम्मू, 11 मई। कश्मीर में रमजान के पवित्र महीने में जम्मू कश्मीर पुलिस ‘अघोषित एकतरफा’ सीजफायर की नीति पर चल रही है। हालांकि केंद्रीय गृहमंत्रालय या फिर राज्य के गृह विभाग की ओर से ऐसा कोई निर्देश उसे नहीं मिला है बल्कि वह नहीं चाहती की रमजान के महीने में धार्मिक कार्यों में कोई खलल पड़े। इतना जरूर था कि सटीक सूचना मिलने पर वह आतंकियों के खिलाफ अभिायन छेड़ने से चूकेगी नहीं।

पुलिस की यह कवायद ऐसे समय में सामने आई है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर से पिछले साल की ही तरह कश्मीर में इस बार भी रमजान माह में सुरक्षाबलों को एकतरफा सीजफायर करने का आदेश देने का आग्रह केंद्र सरकार से किया गया था। पर उनकी इस मांग पर भारी आलोचना हुई थी।

पिछले साल केंद्र सरकार ने सिर्फ एक माह के लिए रमजान महीने में एकतरफा सीजफायर घोषित किया था लेकिन बावजूद इसके आतंकी हमले और मासूम लोगों की हत्याएं नहीं रुकी थीं। अब जबकि पुलिस ने ऐसा कदम उठाया है पर यह घोषित तौर पर नहीं है बल्कि वरिष्ठ अधिकारी कहते थे कि सिर्फ सटीक सूचना मिलने पर ही तलाशी अभियान किया जाएगा और पुख्ता जानकारी के बिना कहीं पर भी जामा तलाशी नहीं ली जाएगी। यह बात अलग है कि पुलिस की इस कवायद से अन्य सुरक्षाबल सहमत नहीं थे और उनका कहना था कि वे ऐसा हमेशा ही करते आए हैं और उन्होंने कभी भी बिना पुख्ता सूचना के कोई आप्रेशन अंजाम नहीं दिया है।

कश्मीर में कम होते आतंकवादी

दरअसल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बकौल, आतंकियों का मनोबल इस समय बहुत ही गिरा हुआ है और कश्मीर में गिनती के आतंकी बचे हुए हैं। उनके मुताबिक, पिछले 4 माह में 80 से अधिक आतंकियों को ढेर कर उनकी कमर तोड़ दी गई है। अधिकारियों का कहना था कि उनकी कवायद आतंकियों के खिलाफ अभियानों को रोके जाने के तौर पर नहीं ली जानी चाहिए बल्कि इसका मकसद आम कश्मीरियों को पवित्र महीने में मुठभेड़ों से होने वाली तकलीफों से बचाना है।

अगर पुलिस अधिकारियों की माने तो आतंकवाद की ओर कश्मीरियों का रुख कम हो रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस साल अभी तक मात्र 32 युवकों ने बंदूक थामी है और तीन अपनी मां की पुकार पर वापस भी लौट आए हैं जबकि ताजा बंदूक उठाने वाले युवकों में से 5 को मार भी गिराया जा चुका है। 

इस साल अभी तक मारे गए 80 से अधिक आतंकियों में से कुछेक तो मात्र कुछेक घंटे पहले ही आतंकवाद की राह पर चले थे जबकि कुछेक का आतंकवाद का जीवनकाल 2 से तीन सप्ताह का ही था।

टॅग्स :जम्मू कश्मीररमजानआतंकवादी
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारदर्द कोई समझे, रील्स से बर्बादी तक?, कैसे पर्यटक और कंटेंट क्रिएटर्स पंपोर सरसों खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान?

कारोबारईरान में फिर से फंसे सैकड़ों कश्मीरी छात्र?, 7 दिन के लिए बंद अजरबैजान सीमा

भारतगंदरबल एनकाउंटर: 7 दिन में रिपोर्ट पेश करो?, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर लिखा

भारतअमरनाथ यात्रा पर पहलगाम नरसंहार की परछाई?, सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता, 29 जून को पूजा और 17 जुलाई से शुरू?

भारतJammu-Kashmir: पाक की ओर से जम्मू सीमा पर गोलीबारी, भारतीय रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट पर हमले की कोशिश नाकाम

भारत अधिक खबरें

भारतTamil Nadu Election 2026: क्या CBSE का नया सिलेबस भाषा विवाद की जड़? सीएम स्टालिन ने कहा- "भाषा थोपने का सुनियोजित प्रयास"

भारतFire Accident: ONGC मुंबई हाई प्लेटफॉर्म पर भीषण आग, 10 लोग घायल; राहत और बचाव कार्य जारी

भारतElection 2026: केरल में चुनावी हिंसा! शशि थरूर के काफिले पर हमला, गनमैन को भी पीटा, 5 धरे गए

भारतदेश के लिए समर्पित ‘एक भारतीय आत्मा’

भारतवाराणसी का रोम-रोम हुआ रोमांचित, दर्शकों ने देखा कैसा था सम्राट विक्रमादित्य का सुशासन, देखें Photos