जम्मू: करीब 15 दिनों से पाकिस्तान से सटे जम्मू कश्मीर के इंटरनेशनल बार्डर और एलओसी पर पाकिस्तानी सेना द्वारा लगातार खेले जा रहे ड्रोन ड्रोन के खेल ने सीमावर्ती इलाकों में दहशत पैदा कर दी है। दहशत का आलम यह है कि सीमावासी ड्रोन के दिखने की खबरें मिलते ही घरों में दुबकने लगे हैं क्योंकि उन्हें आपरेशन सिंदूर की यादें ताजा होने लगती हैं।
कल रात को भी सीमांत इलाकों में 6 स्थानों पर पाकिस्तानी ड्रोन नजर आए थे। यह सिर्फ एलओसी पर ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल बार्डर पर जम्मू के इलाकों में भी मंडरा रहे थे। हालांकि कुछेक तो थोड़ी देर बाद वापस पाकिस्तानी क्षेत्रों में चले गए लेकिन कुछेक को खदेड़ने के लिए भारतीय पक्ष को कथित तौर पर गोलीबारी भी करनी पड़ी थी।
सेनाधिकारियों के बकौल, कल रात को नौशहरा के कलसियां, राजौरी के केरी के डूंगा गला, पुंछ डिग्वार तथा मेंढर के मनकोट इलाकों में जो ड्रोन नजर आए थे वे काफी भीतर तक आ गए थे और उन्हें खदेड़ने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम को एक्टिव करना पड़ा था। हालांकि सांबा के इंटरनेशनल बार्डर को पार करके इस ओर आने वाले दो ड्रोन बाद में खुद ही वापस पाकिस्तानी इलाके में लौट गए थे।
रक्षा प्रवक्ता का मानना था कि पाकिस्तान द्वारा इस तरह की ड्रोन घुसपैठ की गतिविधियों को संघर्ष विराम उल्लंघन के तौर पर लिया जरा रहा है और एक बार डीजीएमओ द्वारा भी इसके प्रति स्पष्ट चेतावनी पिछले हफ्ते दी जा चुकी है पर बावजूद इसके पाक सेना अपनी नापाक हरकतों सें बाज नहीं आ रही है।
सेनाधिकारी कहते थे कि पाकिस्तान के ड्रोन ड्रोन के खेल के पीछे कोई बड़ी साजिश नजर रही है। जबकि सीमावासियों का भी यही मत था जो कहते थे कि पाकिस्तान पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता है। और यह भी एक कड़वा सच है कि सीमाओं पर पाकिस्तान के ड्रोन ड्रोन के खेल की गूंज उन कस्बों और शहरों तक भी होने लगी है जो आपरेशन सिंदूर के दौरान पाक हमलों का शिकार बने थे। इनमें जम्मू शहर भी शामिल है।