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भारत का पहला आम चुनाव: कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला, चुनाव हार गए डॉ. आंबेडकर, पहली बार सांसद बने थे ये बड़े नेता, जानिए पूरी कहानी

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: March 2, 2024 13:00 IST

लालबहादुर शास्त्री, गुलजारीलाल नंदा, मोरारजी भाई देसाई, जीवी मावलंकर, हुमायूं कबीर, ए. के. गोपालन रफी अहमद किदवई, केशवदेव मालवीय, चौधरी ब्रह्मप्रकाश आदि नेताओं को पहले आम चुनाव ने ही संसद सदस्य बनाया।

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ठळक मुद्देजब वोटों की गिनती हुई तो कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलापार्टी को संसद की 489 सीटों में से 364 पर जीत मिलीचुनाव मे कुल 53 पार्टियों ने भाग लिया

India’s First Lok Sabha Election 1951–52:  क्या आप जानते हैं कि भारत के पहले आम चुनाव कब हुए थे? हम बताते हैं, आजाद भारत के पहले आम चुनाव 1951–52 में हुए थे। इस चुनाव में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे। चुनावी प्रक्रिया चार महीने तक चली थी। दरअसल 25 अक्टूबर 1951 को हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की चिनी तहसील में पहला वोट डाला गया। चुनावी प्रक्रिया फरवरी 1952 के आखिरी सप्ताह में समाप्त हुई।

चुनाव मे कुल 53 पार्टियों ने भाग लिया

चुनाव मे कुल 53 पार्टियों ने भाग लिया जिनमें 14 राष्ट्रीय स्तर की और बाकी राज्य स्तर की पार्टियां थीं। जवाहरलाल नेहरु ने अपनी पार्टी कांग्रेस के लिए धुआंधार चुनाव प्रचार किया। बाकी पार्टीयों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश नारायण और डॉ. लोहिया के नेतृत्व वाली सोशलिस्ट पार्टी, आचार्य कृपलानी के नेतृत्व वाली किसान मजदूर प्रजा पार्टी, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, शिड्‌यूल कास्ट फेडरेशन और हिन्दू महासभा प्रमुख विपक्षी पार्टियां थी। चुनाव मे कुल 53 पार्टियों ने भाग लिया जिनमें 14 राष्ट्रीय स्तर की और बाकी राज्य स्तर की पार्टियां थीं।

कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला

जब वोटों की गिनती हुई तो कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला। पार्टी को संसद की 489 सीटों में से 364 पर जीत मिली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।  आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश और डॉ. लोहिया के नेतृत्व वाली सोशलिस्ट पार्टी को 12, आचार्य कृपलानी के नेतृत्व वाली किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 9, हिंदू महासभा को 4, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ को 3, और शिड्‌यूल कास्ट फेडरेशन को 2 सीटें मिलीं। इस चुनाव में 47 निर्दलीय जीते तो 10 स्थानों पर निर्विरोध निर्वाचन भी हुआ।

ये बड़े नेता जीतकर सांसद बने

लालबहादुर शास्त्री, गुलजारीलाल नंदा, मोरारजी भाई देसाई, जीवी मावलंकर, हुमायूं कबीर, ए. के. गोपालन रफी अहमद किदवई, केशवदेव मालवीय, चौधरी ब्रह्मप्रकाश आदि नेताओं को पहले आम चुनाव ने ही संसद सदस्य बनाया। बाद में इनमें से पहले तीन नेता देश के प्रधानमंत्री भी बने। मावलंकर पहले लोकसभा के अध्यक्ष बने। इस चुनाव में डॉ. आंबेडकर बॉम्बे सुरक्षित सीट से कांग्रेस के नारायण साबोदा से हार गए।

दो सदस्य एंग्लो इंडियन समुदाय से नामांकित हुए. ये सदस्य थे फ्रैंक एंटोनी और एइटी बारो। कांग्रेस पूरे देश की 3,280 विधानसभा सीटों में से 2,247 पर विजयी हुई। जवाहरलाल नेहरू फिर से प्रधानमंत्री बने। इस तरह से आजाद भारत में पहली बार लोकतंत्र का महाकुंभ संपन्न हुआ।

(नोट- इस आर्टिकल में बताए गए आंकड़ों का संदर्भ प्रसिद्ध इतिहासकार रामचन्द्र गुहा (Ramachandra Guha) की किताब इंडिया ऑफ्टर गांधी से लिया गया है)

टॅग्स :लोकसभा चुनावजवाहरलाल नेहरूकांग्रेसलाल बहादुर शास्त्रीBhimrao Ambedkar
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