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विद्यालय के लिए आवंटित भूमि से अवैध कब्जे को हटाया, सपा का वनवासी परिवारों को बेघर करने का आरोप

By भाषा | Updated: October 31, 2021 18:20 IST

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वाराणसी, 31 अक्टूबर उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के करसड़ा गांव में अटल आवासीय विद्यालय के लिए आवण्टित भूमि पर कुछ लोगों के अवैध कब्जे को राजस्व विभाग की टीम ने हटा दिया। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।

वहीं इसको लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता मनोज राय धुपचंडी ने प्रशासन पर वनवासी परिवारों को अनैतिक रूप से बेघर करने का आरोप लगाया। सपा प्रवक्ता ने कहा कि वनवासी समाज के 13 परिवार वर्षों से उस भूमि पर रह रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन की शह पर राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में जबरदस्ती उनके घरों को जेसीबी से गिरा दिया। उन्होंने दावा किया कि इससे इन परिवार की महिलाएं और बच्चेखुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह मानवता के विरुद्ध कार्य है और समाजवादी पार्टी इसका विरोध करती है।

वहीं जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा कि करसड़ा में श्रमिकों के बच्चों के लिए श्रम विभाग द्वारा हथकरघा विभाग की भूमि "अटल आवासीय विद्यालय" के लिये आवंटित की गई है एवं यह कार्यवाही तीन महीने से चल रही थी और इसकी जानकारी सभी को थी। उन्होंने कहा कि पूर्व में प्लास्टिक क्षेत्र में ‘ट्रेनिंग कोर्स’ के लिए केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान (सीपेट) को भी हथकरघा विभाग की ही भूमि दी गई थी जिसका निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब कार्य आम जनता की शिक्षा सुविधा के लिए ही हो रहा है।

जिलाधिकारी ने बताया कि हथकरघा विभाग की लगभग एक एकड़ जमीन पर कुछ लोग अवैद्य रूप से काबिज हैं जिनमें से सभी 13 परिवार को पास के ही ग्राम समाज की बंजर भूमि पर पट्टा आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद 3-4 परिवारों को स्थानांतरित किया गया है जबकि अन्य को स्थानांतरित किया जा रहा है जिसके लिए वाहन भी दिए जा रहे हैं।।

उन्होंने कहा कि इसी जमीन पर एक अवैद्य विद्यालय और एक सुअर बाड़ा बनाकर किसी के द्वारा कब्जा किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि इन सभी को अपने स्वामित्व के अभिलेख दिखाने के लिए कहा गया परंतु अभी तक किसी ने भी अपने नाम का अभिलेख नहीं दिखाया है। उन्होंने किसी अन्य व्यक्तियों की खतौनी प्रस्तुत करके भी इनके द्वारा भ्रम फैलाने की प्रयास किया गया।

जिलाधिकारी ने कहा, ‘‘इनको सहानुभूतिपूर्वक आवासीय भूमि पास में ही दी जा रही है। कल से इस प्रकरण का राजनीतिकरण करके श्रमिकों के विद्यालय के निर्माण को रुकवाने का प्रयास किया जा रहा है। दो दिन पूर्व शाम को इनमें से कुछ लोगों द्वारा लोकनिर्माण विभाग ठेकेदार के मजदूरों को अन्य 11 एकड़ खाली भूमि लेवेलिंग करने से रोका गया और मारपीट की गई। आज भी कुछ राजनैतिक लोगों द्वारा बाकी 11 एकड़ भूमि पर चल रहे सरकारी कार्य में बाधा पहुचाने की जानकारी प्राप्त हुई है। कुछ लोगों द्वारा इन 13 परिवारों को आदिवासी कहकर भी भ्रम फैलाया जा रहा है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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