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कोरोना संकट: बेंच बदलने के बाद गुजरात हाई कोर्ट ने कहा- सरकार ने कुछ नहीं किया होता तो हम शायद जिंदा नहीं होते

By पल्लवी कुमारी | Updated: June 1, 2020 08:14 IST

गुजरात में कोरोना वायरस के हालतों पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। हाई कोर्ट की जिस बेंच में इस मामले की सुनवाई हो रही थी, उसके जस्टिस का दूसरी बेंच में ट्रांसफर कर दिया गया है। जस्टिस के ट्रांसफर को लेकर अब विवाद शुरू हो गया है।

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ठळक मुद्देहाईकोर्ट को गुजरात सरकार ने बताया कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस के चलते जान गंवाने वाले 83 प्रतिशत से ज्यादा मरीज पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे।हाई कोर्ट ने कहा, ''संकट के समय, हमें झगड़ने के बजाय साथ आना चाहिए।''

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने कोरोना वायरस को लेकर अहमदाबाद सिविल अस्पताल के कामकाज को लेकर राज्य सरकार को हाल ही में जमकर फटकार लगाई थी। जिसके बाद इस मामले में सुनवाई कर रही बेंच बेंच की जस्टिस का ट्रांसफर कर दिया गया। ट्रांसफर के बाद विवाद शुरू हो गया है। ट्रांसफर के तकरीबन एक हफ्ते बाद ही मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा राज्य सरकार के पक्ष में कहा है, अगर राज्य सरकार जो भी कदम उठा रही है, अगर नहीं उठा रही होती तो अब-तक शायद हम सब मर चुके होते। 

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कोरोना वायरस महामारी से संबंधित एक जनहित याचिका पर स्वत संज्ञान लेते हुए अपने ताजा आदेश में कहा है कि कोविड-19 राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय संकट है और महज सरकार की आलोचना करने से न तो चमत्कारिक रूप से लोग ठीक होने लगेंगे और न ही मर चुके लोग जिंदा होने वाले। अदालत ने महामारी के खिलाफ जंग में राज्य सरकार की मदद के लिए ''सहयोग, सूझबूझ और रचनात्मक आलोचना'' करने की बात कही।

मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है ,''हमारा संदेश स्पष्ट है…जो सभी इस मुश्किल समय में अपनी मदद का हाथ नहीं बढ़ा सकते… उन्हें राज्य सरकार के कामकाज की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है। अगर राज्य सरकार कथित तौर पर कुछ भी नहीं कर रही होती, तो शायद, अब तक हम सब मर चुके होते। इस मुकदमेबाजी में हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वह राज्य सरकार को उसके संवैधानिक और वैधानिक दायित्वों की याद दिलाकर उसे सक्रिय बनाए रखना है।''

मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है, सरकार की कमियों को उजागर करना "केवल लोगों के मन में भय पैदा करता है।" कोर्ट ने पीआईएल से संबंधित अपने आदेशों पर टिप्पणी करने से पहले सभी को "बहुत सावधान" रहने के लिए कहा।

हाई कोर्ट ने कहा, ''संकट के समय, हमें झगड़ने के बजाय साथ आना चाहिए। कोविड-19 राजनीतिक नहीं, मानवीय संकट है। लिहाजा, यह जरूरी है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण न किया जाए।''

जानें 22 मई को अहमदाबाद सिविल अस्पताल के कामकाज को लेकर सुनवाई कर रहे पीठ ने क्या कहा था? 

22 मई को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति इलेश वोरा की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने कहा था कि राज्य सरकार कोविड-19 स्थिति को "कृत्रिम तरीके से कंट्रोल कर रही है। जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस वोरा की खंडपीठ ने बीते हफ्ते को कहा कि अस्पताल के प्रशासन और कामकाज पर नजर रखने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री की है। बेंच ने कहा था कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल की हालत दयनीय और कालकोठरी जैसी है। यह पीठ 11 मई से कोविड-19 से संबंधित मुद्दों पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

हाईकोर्ट को गुजरात सरकार ने बताया कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस के चलते जान गंवाने वाले 83 प्रतिशत से ज्यादा मरीज पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। अहमदाबाद के अस्पतालों में अब-तक 789 कोरोना मरीजों की जान गई है। इसमें से अकेले 415 मौतें सिविल अस्पताल में हुई हैं।

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