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यूपी के पूर्व DGP ओपी सिंह का बड़ा दावा- 1990 में ही अतीक अहमद के आतंक को कर सकते थे खत्म अगर न होता कोई राजनीतिक दबाव

By मनाली रस्तोगी | Updated: March 16, 2023 10:56 IST

उमेश पाल हत्याकांड में उत्तर प्रदेश के माफिया-राजनेता और पूर्व सांसद अतीक अहमद की संलिप्तता को लेकर उठे बवाल के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओम प्रकाश सिंह (ओपी सिंह) ने एक बड़ा दावा किया है।

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ठळक मुद्देयूपी के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह का दावा है कि वह 1990 में ही अतीक अहमद के आतंक को खत्म कर सकते थे।सिंह ने दावा किया कि माफिया के आदमियों द्वारा पूरी पुलिस पार्टी को मार गिराया जा सकता था।उन्होंने कहा कि अगर पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद अतीक को गिरफ्तार कर लिया जाता या उसे मार गिराया जाता तो इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा नहीं होता।

लखनऊ: उमेश पाल हत्याकांड में उत्तर प्रदेश के माफिया-राजनेता और पूर्व सांसद अतीक अहमद की संलिप्तता को लेकर उठे बवाल के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओम प्रकाश सिंह (ओपी सिंह) ने एक बड़ा दावा किया है। उनका दावा है कि वह 1990 में ही अतीक अहमद के आतंक को खत्म कर सकते थे, अगर उसे जाने देने का कोई राजनीतिक दबाव नहीं होता।

इंडिया टुडे से बात करते हुए पूर्व डीजीपी ने दावा किया कि जब वह 1989-90 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के एसपी सिटी के रूप में तैनात थे, तो उन्होंने अतीक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के जवाब में पुलिस की एक टीम के साथ अतीक की मांद पर छापा मारा था। उस समय अतीक के हजारों समर्थकों ने पुलिस दल को घेर लिया था। 

सिंह ने दावा किया कि माफिया के आदमियों द्वारा पूरी पुलिस पार्टी को मार गिराया जा सकता था, अगर उन्होंने अतीक को चेतावनी नहीं दी होती कि अगर उनके समर्थकों ने पुलिस पार्टी पर एक भी गोली चलाई, तो अतीक और उनके समर्थक दोनों को पुलिस द्वारा गोली मार दी जाएगी। 

यूपी के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि वह अतीक और उसके गिरोह को वहीं गिरफ्तार करना चाहते थे, लेकिन राजनीतिक दबाव ने उनकी टीम को बिना किसी गिरफ्तारी के वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद अतीक को गिरफ्तार कर लिया जाता या उसे मार गिराया जाता तो इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा नहीं होता।

ओम प्रकाश सिंह (ओपी सिंह) ने आगे कहा कि उस समय उनके काम की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं और इलाहाबाद के लोगों ने प्रशंसा की थी, लेकिन सत्ताधारी दल माफिया का समर्थन कर रहा था, जिसके कारण वह यूपी के सबसे खूंखार गैंगस्टरों में से एक बन गया। 

बता दें कि पुलिस अब तक अतीक के गिरोह के केवल 10 सदस्यों का पता लगा पाई है और अब अन्य सदस्यों की तलाश पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ आगरा सहित यूपी के विभिन्न शहरों में कर रही है। 

इस बीच इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के दावों पर टिप्पणी करते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद दोनों विधायक थे और राज्य की राजनीतिक मशीनरी पर उनकी मजबूत पकड़ थी। हालांकि, अब ये दोनों एनकाउंटर में मारे जाने के डर से खुद को जेलों के अंदर सुरक्षित मानते हैं।

टॅग्स :अतीक अहमदप्रयागराजमुख्तार अंसारीउत्तर प्रदेश
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