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पहलगाम हमले पर वीडियो बनाने पर नेहा राठौर के खिलाफ FIR दर्ज, लोक गायिका ने बताई आपबीती; बोलीं- "केस लड़ने के भी पैसे नहीं"

By अंजली चौहान | Updated: April 28, 2025 11:47 IST

Neha Singh Rathore Case: अभय प्रताप सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि एक्स पर राठौर की पोस्ट में एक समुदाय को भड़काने का बार-बार प्रयास किया गया

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Neha Singh Rathore Case: भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर के खिलाफ देशद्रोह समेत कई गंभीर धाराओं में लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि यह प्राथमिकी कवि अभय प्रताप सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई है। 

पुलिस सूत्रों ने दर्ज रिपोर्ट के हवाले से बताया कि नेहा सिंह राठौर ने अपने ‘एक्स’ हैंडल के जरिए पहलगाम आतंकी हमले को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और सोशल मीडिया मंच पर ऐसे वीडियो और पोस्ट साझा किए जिनका राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। 

उन्होंने बताया कि मुकदमे में राठौर पर धर्म और जाति के आधार पर समुदायों के बीच मतभेद पैदा करने और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया है कि राठौर ने पहलगाम हमले में निर्दोष पीड़ितों की मौत पर सवाल उठाए और राष्ट्र विरोधी बयान दिए, जिससे शांति और सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका उत्पन्न हुई। 

उनके बयान पाकिस्तान में वायरल हो गए हैं, जहां मीडिया द्वारा उनका इस्तेमाल भारत विरोधी प्रचार के लिए किया जा रहा है।

नेहा राठौर ने दी प्रतिक्रिया

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर नेहा राठौर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर यूजर्स को जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट के जरिए केस के बारे में कहते हुए दावा किया कि उनके पास केस लड़ने के लिए भी पैसे नहीं है। सिंगर ने पोस्ट में लिखा, "मेरे ऊपर लखनऊ में FIR दर्ज हो चुकी है, क्या कोई वकील मेरी मदद कर सकता है? मेरे पास वक़ील की फ़ीस देने के लिए पैसा नहीं है। मेरे ICICI बैंक अकाउंट में सिर्फ़ 519 रुपये हैं जिसमें से 500 रुपये तबला वादक को देकर कल मैं नया गीत रिकॉर्ड करूँगी।"

हजरतगंज पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196(1)(ए) (धर्म, जाति, भाषा, नस्ल या समुदाय के आधार पर दुश्मनी, घृणा या बैर को बढ़ावा देना), 196(1)(बी) (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना, 197(1)(ए) (किसी वर्ग को धार्मिक, जातीय, भाषायी या क्षेत्रीय आधार पर भारत के संविधान के प्रति सच्चा निष्ठावान और श्रद्धावान नहीं होने का आरोप लगाना), 197(1)(बी) (यह प्रचार करना कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को उनके धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर नागरिक अधिकारों से वंचित किया जाना चाहिए), 197(1)(सी) किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्यों को भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा नहीं रखने का आरोप लगाना), 197(1)(डी) (राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप या दावा करने), 353(1)(सी) जानबूझकर झूठी या भ्रामक सूचना, अफवाहें या बयान देना, 353(2) (सार्वजनिक शरारत, घृणा और वैमनस्य फैलाने वाले बयान देना), 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के जानबूझकर इरादे से शब्दों आदि का उच्चारण करना), 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कार्य करना) और आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत मामला दर्ज किया है। 

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