लाइव न्यूज़ :

ऊर्जा सुरक्षा: चीन के बराबर रणनीतिक प्राकृतिक गैस रिजर्व बनाने की योजना बना रहा है भारत, सरकार से मंजूरी मिली

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: November 21, 2023 13:54 IST

भारत का लक्ष्य अपने ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 6% से बढ़ाकर 2030 तक 15% करना है। इसे प्राप्त करने के लिए, बड़ी भंडारण क्षमता, अच्छी तरह से जुड़े पाइपलाइन नेटवर्क और एक मजबूत घरेलू गैस बाजार विकसित करना महत्वपूर्ण है।

Open in App
ठळक मुद्देभारत यूरोप और चीन के समान रणनीतिक प्राकृतिक गैस रिजर्व बनाने की योजना बना रहा हैभारत का लक्ष्य अपने ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 6% से बढ़ाकर 2030 तक 15% करना हैभारत का लक्ष्य 3-4 बीसीएम गैस भंडारण क्षमता हासिल करना है

नई दिल्ली: ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत एक बड़ी योजना बनाने जा रहा है। भारत एक रणनीतिक प्राकृतिक गैस भंडार स्थापित करने की योजना बना रहा है जो 4 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) तक आयातित गैस का भंडारण कर सकता है। यह रिजर्व आपूर्ति आपात स्थिति के मामले में बैकअप के रूप में काम करेगा और घरेलू बाजार को स्थिर करने में मदद करेगा। 

इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक  गैस रिजर्व स्थापित करने के निर्णय को तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हरी झंडी दे दी है। उन्होंने ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी), ऑयल इंडिया और गेल को एक विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।

रणनीतिक जरूरतों और आपात स्थिति से निपटने के लिए ऐसी किसी योजना पर लंबे समय से विचार चल रहा था। लेकिन समें शामिल उच्च लागत के कारण इसमें बाधा उत्पन्न हुई थी। हाल फिलहाल में  भू-राजनीतिक कारकों के कारण वैश्विक गैस बाजार में हालिया व्यवधान ने इस रणनीतिक नीति के पुनर्मूल्यांकन को प्रेरित किया है। भारत का लक्ष्य 3-4 बीसीएम  गैस भंडारण क्षमता हासिल करना है। इसकी लागत 1-2 अरब डॉलर होने का अनुमान है।

बता दें कि भारत का लक्ष्य अपने ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 6% से बढ़ाकर 2030 तक 15% करना है।  इसे प्राप्त करने के लिए, बड़ी भंडारण क्षमता, अच्छी तरह से जुड़े पाइपलाइन नेटवर्क और एक मजबूत घरेलू गैस बाजार विकसित करना महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, एक बड़ी गैस भंडारण सुविधा होने से भारत एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित होगा और भविष्य में श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों को आपूर्ति करने में सक्षम होगा।

ऊर्जा सुरक्षा रणनीतिक कारणों से भी जरूरी है। सीमा पर पिछले तीन साल से चीन से तनाव जारी है। अगर कभी आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर कोई तनाव बढ़ता है तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार लंबे समय तक रूक सकता है। ऐसे में पर्याप्त ऊर्जा भंडारण उपयोगी साबित हो सकता है।

टॅग्स :मोदी सरकारOil India Ltd.ओएनजीसीहरदीप सिंह पुरीचीनEuropean Union
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारPetrol, Diesel Price Today: बड़े शहरों में क्या है आज का रेट, यहां देखें पूरी लिस्ट

भारतImport Duty Cut: सरकार ने आज से 41 वस्तुओं पर हटाया आयात शुल्क, चेक करें पूरी लिस्ट

भारतऊर्जा संकट में भी आत्मविश्वास कायम रहने का क्या है राज ?

भारतBihar News: राज्य अधिकारियों ने दिया अपनी संपत्ति का ब्योरा, जानें सबसे ज्यादा अमीर कौन?

कारोबारNew Labour Code: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर, 1 अप्रैल से लागू हुए नए नियम, ओवरटाइम और PF में हुए ये बदलाव

भारत अधिक खबरें

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'

भारतउत्तर प्रदेश उपचुनाव 2026ः घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीट पर पड़ेंगे वोट?, 2027 विस चुनाव से पहले सेमीफाइनल, सीएम योगी-अखिलेश यादव में टक्कर?