लाइव न्यूज़ :

डीयू ने राज्य बोर्ड के विषयों को ‘कट-ऑफ’ गणना में शामिल करने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए

By भाषा | Updated: October 6, 2021 19:58 IST

Open in App

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कॉलेजों में केरल राज्य बोर्ड के छात्रों के बड़ी संख्या में दाखिले के साथ, विश्वविद्यालय ने ‘कट-ऑफ’ अंकों की गणना में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के तहत पढ़ाए जाने वाले विषयों के समकक्ष अन्य राज्य बोर्डों के विषयों को शामिल करने पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

एक समिति है, जो यह तय करती है कि राज्य बोर्डों के कौन से विषय सीबीएसई विषयों के समान होंगे और ‘कट-ऑफ’ अंकों की गणना करते समय उनका समावेश- सर्वश्रेष्ठ-चार अंकों के औसत में होगा।

विश्वविद्यालय में दाखिला कमेटी के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा, ‘‘अगर वह (समिति) कहती है कि एक विषय समकक्ष नहीं है, तो इसे ‘सर्वश्रेष्ठ चार’ में शामिल नहीं किया जा सकता है।’’

मंगलवार को कॉलेजों के साथ बैठक कर उनसे सूची साझा की गई।

गुप्ता ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि सीबीएसई ने व्यावहारिक गणित (एप्लाइड मैथमैटिक्स) को एक विषय के रूप में शुरू किया है ताकि उन छात्रों की मदद की जा सके, जो गणित से अच्छी तरह वाकिफ नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि यह गणित की तुलना में आसान है।

उन्होंने कहा, ‘‘सीबीएसई ने यह भी लिखा है कि एप्लाइड मैथमैटिक्स के छात्र भौतिकी (ऑनर्स), रसायन विज्ञान (ऑनर्स) और गणित (ऑनर्स) के लिए पात्र नहीं होंगे। समिति ने इस पर विचार किया और पाया कि एप्लाइड मैथमैटिक्स को अर्थशास्त्र (ऑनर्स) के लिए नहीं माना जा सकता है। पाठ्यक्रम के लिए गणित के कठिन स्तर की आवश्यकता होती है, लेकिन इसे बी.कॉम (ऑनर्स) के लिए माना जा सकता है।’’

गुप्ता ने कहा कि समिति समानता पर निर्णय लेते समय सिद्धांत और व्यावहारिक घटक, पाठ्यक्रम आदि जैसे कारकों पर विचार करती है।

उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में गणित और सांख्यिकी शीर्षक वाला एक विषय है, जिसे दिशानिर्देशों के अनुसार सीबीएसई गणित के समकक्ष माना जाएगा, जबकि नगालैंड स्कूली शिक्षा बोर्ड के ‘फंडामेंटल्स ऑफ बिजनेस मैथमैटिक्स’ को सीबीएसई में गणित के भी समकक्ष माना जाएगा।

इस बीच, ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने मांग की कि सीबीएसई और इसका मूल्यांकन दाखिले में निर्णायक कारक नहीं होना चाहिए। छात्र संगठन ने कहा, ‘‘डीयू सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले छात्रों को दाखिला देने के लिए बाध्य है और यह शर्म की बात है कि आवेदकों के साथ उनके बोर्ड के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, जबकि इन अलग-अलग बोर्डों के आवेदकों द्वारा की गई मेहनत समान है।’’

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए 2.87 लाख से अधिक छात्रों ने आवेदन किया है, जो पिछले साल 3.53 लाख आवेदनों से कम है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेटयशस्वी जायसवाल ने MI के गेंदबाजों की उखेड़ी बखिया, छक्के लगाकर 'सेंचुरी ऑफ़ मैक्सिमम्स' क्लब में हुए शामिल

क्रिकेटRR vs MI: वैभव सूर्यवंशी ने बुमराह को भी नहीं बख़्शा, एमआई पेसर को जड़े 2 छक्के | VIDEO

विश्व'अगले 48 घंटों तक घर के अंदर ही रहें' : ईरान में मौजूद नागरिकों के लिए भारतीय दूतावास तत्काल सुरक्षा एडवाइज़री जारी की

ज़रा हटकेक्या है नंदगोपाल गुप्ता नंदी और यूपी के उन्नाव में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का नाता?

विश्वक्या डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ करेंगे परमाणु हथियार का इस्तेमाल?, व्हाइट हाउस ने दिया जवाब

भारत अधिक खबरें

भारतNagpur: पवनी सफारी में दिखा दुर्लभ ‘काला चीतल’, पर्यटकों में बढ़ा रोमांच

भारत‘अपने स्तर को नीचे न गिराएं’: मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘गुजरात के लोग अनपढ़ हैं’ वाले बयान पर शशि थरूर की सलाह

भारत'इस बार पाकिस्तान के कितने टुकड़े होंगे ये तो सिर्फ ऊपरवाला जानता है', राजनाथ सिंह ने PAK के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ की धमकी का दिया करारा जवाब

भारत403 करोड़ रुपए खर्च?, योगी सरकार का सियासी दांव, बीआर अंबेडकर की मूर्ति पर लगेगा छत्र

भारतमहाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा टेस्ट अनिवार्य रूप से किया शुरू