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किसान की मौत की एसआईटी जांच की मांग;अदालत ने दिल्ली सरकार,पुलिस से मांगा जवाब

By भाषा | Updated: February 11, 2021 18:54 IST

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नयी दिल्ली, 11 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शनकारी किसानों की ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान कथित तौर पर ट्रैक्टर पलटने से 25 वर्षीय एक किसान की मौत होने की घटना की अदालत की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग करने वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार और पुलिस से जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस और रामपुर (उप्र) के जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को नोटिस जारी किया।

रामपुर के जिला अस्पताल में ही मृतक का पोस्टमार्टम किया गया था।

अदालत ने मृतक किसान नवरीत सिंह के दादा की एक याचिका पर यह नोटिस जारी किया, जिन्होंने दावा किया है कि उनके पोते के सिर में गोली लगने के घाव थे।

अदालत ने दिल्ली पुलिस को जांच के बारे में सुनवाई की अगली तारीख 26 फरवरी तक एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश होते हुए अदालत से कहा कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस कर्मियों के बीच हिंसक झड़प होने के दौरान सिंह की मौत यहां आईटीओ पर उनका ट्रैक्टर पलटने के कारण हुई थी।

उन्होंने कहा कि सिंह की मौत के सिलसिले में एक सामान्य प्राथमिकी आई पी एस्टेट पुलिस थाने में दर्ज की गई थी।

मृतक के दादा की ओर से पेश हुई अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत से कहा कि दिल्ली पुलिस ने इस विषय में जिस तरह का आचरण किया है उसके चलते उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि यह दुर्घटना में हुई मौत का मामला था तो भी पुलिस ने सारी प्रक्रियाएं छोड़ दीं, जैसे कि मौत के कारण का पता लगाने के लिए छानबीन करना, पोस्टमार्टम कराना और प्राथमिकी दर्ज करना आदि, जो कि कानून के मुताबिक जरूरी है।

ग्रोवर ने कहा कि मृतक के दादा शव को उत्तर प्रदेश स्थित अपने मूल निवास स्थान पर ले गये, जहां पोस्टमार्टम किया गया।

वहीं, पुलिस ने इलाके में घटनास्थल के आसपास के सारे सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिये, जिनमें कैमरों से ली गई तस्वीरें भी शामिल हैं और अब तक सिर्फ चुनिंदा तरीके से वीडियो जारी किये हैं।

ग्रोवर ने अदालत से कहा कि ब्रिटेन के एक पैथोलॉजिस्ट ने घटना का वीडियो और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को देख कर कहा है कि मृतक के शरीर पर मौजूद चोट के निशान कम से कम एक या दो गोलियों के घाव के समान हैं।

उन्होंने दलील दी कि इससे संकेत मिलता है कि किसान ने ट्रैक्टर पर नियंत्रण खो दिया और वह पलट गया क्योंकि पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें गोली मारी गई थी।

यचिका के जरिये उप्र पुलिस को यचिकाकर्ता को प्राथमिकी की प्रति साझा करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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