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राज्यसभा में उठी उच्च शिक्षण संस्थानों में पुरानी आरक्षण प्रणाली बहाल करने की मांग

By भाषा | Updated: June 27, 2019 17:30 IST

सपा के जावेद अली खान ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सदन में चर्चा हुई थी और आठ फरवरी को मानव संसाधन विकास मंत्री ने आश्वासन दिया था कि 13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली पर रोक लगा कर, 200 प्वाइंट वाली पुरानी प्रणाली लाई जाएगी।

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अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग को 50 फीसदी आरक्षण दिए बिना ही अध्यापकों की रिक्तियां भरने के लिए चार विश्वविद्यालयों द्वारा विज्ञापन दिए जाने का मुद्दा बृहस्पतिवार को राज्यसभा में उठाया गया और सभापति एम वेंकैया नायडू ने सरकार को इस बारे में विचार करने का निर्देश दिया।

सपा के जावेद अली खान ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सदन में चर्चा हुई थी और आठ फरवरी को मानव संसाधन विकास मंत्री ने आश्वासन दिया था कि 13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली पर रोक लगा कर, 200 प्वाइंट वाली पुरानी प्रणाली लाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा वाले सार्वजनिक संस्थानों में अध्यापकों के पद पर आरक्षण के लिए पुरानी प्रणाली बहाल करने की खातिर मार्च में सरकार ने अध्यादेश भी जारी किया था। इसके बावजूद चार विश्वविद्यालयों ने अध्यापकों की भर्ती के लिए जो विज्ञापन दिए गए उनमें अजा, अजजा और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए समुचित आरक्षण व्यवस्था नहीं थी।

जावेद अली खान ने पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, कर्नाटक विश्वविद्यालय, तमिलनाडु विश्वविद्यालय और मध्यप्रदेश के अमरकंटक में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय ने सहायक प्राध्यापक, एसोसिएट प्राध्यापक और प्राध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन दिए। इन विज्ञापनों में उनमें अजा, अजजा और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए समुचित आरक्षण नहीं था।

खान ने कहा कि विज्ञापन में अजा और अजजा श्रेणी में मानक से कम आरक्षण था और अन्य पिछडा वर्ग के लिए सीट ही नहीं थी। जबकि केंद्रीय आरक्षण प्रणाली में अनुसूचित जातियों के लिए 15 फीसदी कोटे का, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5 फीसदी कोटे का और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी कोटे का प्रावधान है।

सपा सदस्य ने सरकार से पुरानी आरक्षण प्रणाली बहाल करने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि आरक्षित वर्गों को उनका हक मिले। नायडू ने सदन के नेता थावरचंद गहलोत से कहा कि वह सरकार से इस मुद्दे को देखने और समाधान निकालने के लिए कहे।

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