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दिल्ली: आग में फंसे लोगों को बचाने के लिए तीन मंजिला इमारत की 'ग्रिल' पर चढ़े दो पुलिसकर्मी

By भाषा | Updated: March 26, 2021 21:56 IST

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नयी दिल्ली, 26 मार्च दिल्ली पुलिस के दो कर्मियों ने शुक्रवार सुबह ग्रेटर कैलाश- एक में आग की चपेट में आई तीन मंजिला एक इमारत की ग्रिल पर चढ़कर दहशतजदा एक परिवार के तीन सदस्यों की जान बचाने में मदद की।

पुलिस ने यह जानकारी दी।

दोनों पुलिसकर्मी तीसरी मंजिल पर लगभग 15 से 20 मिनट तक ग्रिल से लटके रहे और परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाते रहे।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुबह पौने सात बजे कॉल आई कि एक घर की दूसरी और तीसरी मंजिल पर आग लग गई है।

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) अतुल कुमार ठाकुर ने कहा, 'अमित सुधाकर (56), उसकी पत्नी शालिनी (48) और मां सुधा (87) तीसरी मंजिल की बालकनी में फंसी हुई थीं जो लोहे की ग्रिल से बंद थी। '

पुलिस ने कहा कि आग इमारत की दूसरी मंजिल से शुरू हुई और तीसरी मंजिल पर पहुंच गई।

अग्निशमन विभाग ने कहा कि उन्हें भी आग लगने की सूचना मिली और आग बुझाने के बाद तीसरी मंजिल से तीन लोगों को सुरक्षित बचाकर निकाल लिया गया।

ग्रेटर कैलाश पुलिस थाने के प्रभारी रितेश शर्मा ने कहा कि आरडब्ल्यूए के एक अधिकारी ने कॉल कर घटना की सूचना दी।

शर्मा ने कहा, “कॉल आने के बाद मैं घटनास्थल पर अन्य कर्मियों के साथ तत्काल पहुंचा। सुबह की गश्त पर निकले कर्मी भी वहां पहुंचे। हमने देखा कि दूसरी मंजिल पर आग लगी है।”

उन्होंने कहा, “हमने जांच की तो पता चला कि इमारत की निचली मंजिल पर कोई नहीं है। दूसरी मंजिल पर केवल एक केयरटेकर था जहां आग लगी थी और वह समय रहते घर से बाहर निकल गया था। हमें बताया गया कि इमारत की पिछले हिस्से में कुछ लोग फंसे हैं और मदद के लिए चिल्ला रहे हैं।”

इसके बाद पुलिसकर्मी पीछे गए और तीसरी मंजिल पर तीन लोगों को देखा।

शर्मा ने कहा, “हमने पहले उनसे कहा कि वह बालकनी के उस हिस्से की उल्टी दिशा में चले जाएं जहां से धुआं आ रहा था। हर मंजिल पर ग्रिल लगी थी। पहली बड़ी बाधा थी इमारत के पास खड़ा बिजली का खंबा। खंबे और इमारत के बीच केवल दो फुट का फासला था और कर्मी उसी से चढ़ कर ऊपर गए।”

एसएचओ ने कहा कि हेड कांस्टेबल मुन्नी लाल और कांस्टेबल संदीप इमारत की तीसरी मंजिल पर चढ़ गए। उन्होंने बताया, “घटनास्थल पर मौजूद अन्य कर्मियों ने भी मदद करनी चाही लेकिन मैंने उन्हें रोक दिया क्योंकि उनके वजन से ग्रिल गिर सकती थी। लाल और संदीप ने ग्रिल को तोड़ने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुए। उन्होंने नट बोल्ट खोलने चाहे लेकिन वह वेल्ड किए हुए थे।”

पुलिस ने कहा कि बाद में जब दमकल की गाड़ियों ने आग बुझा दी तब जाकर परिवार को सदस्यों को बचाकर इमारत की सीढ़ियों से नीचे लाया गया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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