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दिल्ली दंगे: पुलिसकर्मी पर बंदूक तानने वाले शाहरुख पठान की अंतरिम जमानत याचिका खारिज

By भाषा | Updated: November 10, 2020 21:43 IST

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नयी दिल्ली, 10 नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने दंगों के दौरान पुलिस हेड कांस्टेबल दीपक दहिया पर बंदूक तानने वाले शाहरुख पठान की दो अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उसकी बंदूक तानने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

पहली अंतरिम जमानत याचिका हेड कांस्टेबल दीपक दहिया पर कथित तौर पर बंदूक तानने और गोली चलाने के मामले में हुई गिरफ्तारी के सिलसिले में सोमवार को खारिज की गई थी।

दूसरा मामला जाफराबाद इलाके में 24 फरवरी को सांप्रदायिक हिंसा के दौरान रोहित शुक्ला नामक व्यक्ति को कथित तौर पर गोली लगने से संबंधित था। इस मामले में भी उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

दोनों ही मामलों में अदालत ने पठान के आचरण पर सवाल उठाए और कहा कि घटना के बाद वह जिस तरह से फरार हुआ और बाद में उसे गिरफ्तार किया गया, उससे लगता है कि उसके फरार होने का जोखिम है।

पहले मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि मामले की गंभीरता उसे अंतरिम जमानत का किसी भी तरह का फायदा नहीं देने के लिये पर्याप्त है।

अदालत ने नौ नवंबर को पारित अपने आदेश में कहा, “मौजूदा मामले में, 24 फरवरी 2020 को जब दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के निकट झड़प, भारी पथराव और गोलीबारी हुई, अभियोजन के मुताबिक, याचिकाकर्ता/आरोपी शाहरुख पठान पिस्तौल लहराते हुए दिखा और उसने वहां कानून-व्यवस्था को बरकरार रखने के लिये तैनात हेड कांस्टेबल दीपक दहिया पर पिस्तौल तानी।”

अदालत ने कहा, “आरोप है कि आरोपी ने दंगों में हिस्सा लिया और उसकी शिनाख्त भी हुई..इसलिये मौजूदा मामले की गंभीरता आरोपी को अंतरिम जमानत से इनकार करने के लिये पर्याप्त है।”

वहीं दूसरे मामले में अदालत ने कहा कि पठान को दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया था और दिल्ली उच्च न्यायालय की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की अंतरिम जमानत के संदर्भ में दी गई सिफारिशें ऐसे मामलों में लागू नहीं होतीं।

अदालत ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड के मुताबिक उसकी लोकेशन दर्शाती है कि वह घटना के दिन मौके पर मौजूद था और तस्वीरों में भी वह वहां नजर आ रहा है।

पठान की याचिका में कहा गया है कि उसकी मां का ऑपरेशन होना है, जिनकी देखभाल के लिये उसे अंतरिम जमानत चाहिये।

याचिका में यह भी कहा गया है कि उसके पिता के घुटने का ऑपरेशन होना है। इस दौरान उसका मौजूद रहना जरूरी है।

अदालत ने कहा कि पुलिस के जवाब के मुताबिक उसके पिता के घुटने के ऑपरेशन को लेकर कोई जल्दी नहीं है और पठान के पिता तथा संबंधी उसकी मां का ध्यान रख सकते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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