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नक्सल और उग्रवाद क्षेत्र में तैनात होंगे CRPF के युवा जवान, जो लड़ाकू क्षमता को हर समय ऊर्जावान और घातक रखे, शाह का निर्देश

By भाषा | Updated: December 6, 2019 17:34 IST

देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ (सीआरपीएफ) में 3.25 लाख से अधिक कर्मी हैं। गौरतलब है कि शाह ने हाल ही में यहां सीआरपीएफ मुख्यालय में बल की समीक्षा की थी। इसके बाद उन्होंने देश के प्रमुख आंतरिक सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) को एक ऐसा तंत्र तैयार करने का निर्देश दिया था, जो इसकी लड़ाकू क्षमता को हर समय ऊर्जावान और घातक रखे।

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ठळक मुद्देएक आदेश के मुताबिक सीआरपीएफ ने छह अधिकारियों की एक समिति का गठन किया है।इस बारे में एक रूपरेखा तैयार करेगी कि क्या कोई ऐसी ऊपरी उम्र सीमा निर्धारित की जा सकती है।

सीआरपीएफनक्सल और उग्रवाद रोधी अभियानों में "युवा और तंदरुस्त" जवानों को तैनात करने के केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ (सीआरपीएफ) में 3.25 लाख से अधिक कर्मी हैं। गौरतलब है कि शाह ने हाल ही में यहां सीआरपीएफ मुख्यालय में बल की समीक्षा की थी। इसके बाद उन्होंने देश के प्रमुख आंतरिक सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) को एक ऐसा तंत्र तैयार करने का निर्देश दिया था, जो इसकी लड़ाकू क्षमता को हर समय ऊर्जावान और घातक रखे।

एक आदेश के मुताबिक सीआरपीएफ ने छह अधिकारियों की एक समिति का गठन किया है जो इस बारे में एक रूपरेखा तैयार करेगी कि क्या कोई ऐसी ऊपरी उम्र सीमा निर्धारित की जा सकती है जिसके बाद बल के कर्मियों को संगठन के अंदर तुलनात्मक रूप से कम कड़ी ड्यूटी में भेजा जा सकता हो या ऐसे कर्मियों को कम कठोर ड्यूटी दी जा सकती हो।

सीआरपीएफ के विशेष महानिदेशक (एसडीजी) रैंक के एक अधिकारी की अध्यक्षता वाली यह समिति इस पर भी विचार विमर्श करेगी कि क्या ऐसे उम्रदराज सुरक्षाकर्मियों को एसएसबी, सीआईएसएफ जैसे जैसे केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में भेजा जा सकता है, ताकि उनके लिये बेहतर "आराम और स्वास्थ्य लाभ" सुनिश्चित किया जा सके।

अधिकारियों ने कहा कि समिति को 15 दिसंबर तक अपनी "विशिष्ट" सिफारिशें सौंपने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि इस कदम का उद्देश्य सीआरपीएफ को अभियान के लिए तंदरूस्त रखना है क्योंकि इसे माओवादियों से लड़ने, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का मुकाबला करने और पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद से निपटने जैसे देश में आंतरिक सुरक्षा की कठोरतम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

समिति इस बारे में विचार करेगी कि क्या 35 वर्ष की आयु सीमा रेखा रखी जाए ताकि इस उम्र सीमा को पार करने वाले कर्मियों को मेडिकल, ट्रांसपोर्ट और अन्य प्रशासनिक शाखाओं में ड्यूटी पर भेजा जा सके ताकि उन्हें अधिक मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़े। 

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