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कश्मीर में कोरोना फिर से डराने लगा, सख्ती के साथ ही पाबंदियां भी लागू, लद्दाख में केस बढ़े

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: November 29, 2021 15:19 IST

पिछले 24 घंटों में कोरोना के 145 नए मामले मिले हैं। इनमें से जम्मू संभाग में 18 व कश्मीर संभाग में 127 नए मामले आए हैं।

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ठळक मुद्देकोविड संक्रमित मामले फिर से बढ़ने लगे हैं।जुलाई के बाद नवंबर में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़ी है। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई को सात संक्रमित मरीजों की मौत हुई, जिसके बाद इसमें कमी आई।

जम्मूः कश्मीर में कोरोना के बढ़ते मामलों और इसके सामुदायिक स्तर पर तेजी से  फैलने के कारण माहौल दहशतजदा हो गया है। नतीजतन पाबंदियां लागू करने के साथ ही सख्ती भी बरती जाने लगी है। लद्दाख में भी मामले बढ़ने लगे हैं।

 

प्रदेश में संक्रमण की दर बढ़ने और कोरोना के ओमिक्रान वेरिएंट के प्रति केंद्र की हिदायतों के बाद जम्मू कश्मीर में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। अस्पतालों को विशेष एहतियात बरतने को कहा गया है। इस बीच प्रदेश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 145 नए मामले मिले हैं। इनमें से जम्मू संभाग में 18 व कश्मीर संभाग में 127 नए मामले आए हैं।

अधिकारियों ने माना है कि कोविड संक्रमित मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। इस वर्ष जुलाई के बाद नवंबर में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़ी है। प्रदेश प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई को सात संक्रमित मरीजों की मौत हुई, जिसके बाद इसमें कमी आई। लेकिन अब नवंबर से जैसे-जैसे संक्रमित मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, वैसे ही मौतें भी बढ़ने लगी हैं।

कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन मिलने से फैली अफरा-तफरी के बीच जम्मू कश्मीर में भी सभी एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं। इस संभावित प्रकोप की रोकथाम के लिए जहां प्रदेश प्रशासन की ओर से उचित कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने भी अपने स्तर पर अदालतों में कोविड-19 प्रोटोकाल को लेकर नए सिरे से हिदायतें जारी कर दी हैं।

हाईकोर्ट ने प्रदेश की सभी अदालतों में कोविड-19 प्रोटोकाल का सख्ती से पालन करने, बिना वैक्सीन वकीलों व याचियों को कोर्ट में परिसर में दाखिल न होने देने, केस लिस्ट होने पर ही वकीलों को कोर्ट परिसर में दाखिल होने व कोर्ट परिसर में अनिवार्य रूप से मास्क पहनने व आवश्यक दूरी अपनाने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि जहां जरूरी हो, वहीं गवाह या याची को पेश किया जाए और इसके लिए उनके पास वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट होना अनिवार्य होगा व पूर्व में इसकी सूचना देनी होगी। दूसरी ओर लद्दाख के लेह में तापमान में गिरावट के साथ ही कोरोना संक्रमण के मामलों में भी तेजी आ रही है।

लद्दाख में सामने आए संक्रमण के 34 नए मामलों में से 32 मामले लेह जिले से सामने आए हैं। इस समय लेह का न्यूनतम तापमान शून्य से 11.8 डिग्री नीचे है। इसी बीच लद्दाख में कोरोना के 34 नए मामले सामने आने के साथ ही इस समय क्षेत्र के अस्पतालों में इलाज करवा रहे संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 268 हो गई है। इनमें से 246 मामले लेह जिले में हैं तो वहीं 22 मामले कारगिल जिले में हैं। लद्दाख स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार लेह में इलाज करवा रहे 15 संक्रमित ठीक होकर घरों को लौट गए हैं।

क्या फिर ढलान पर होगा कश्मीर का पर्यटन?

इस साल जुलाई में अनलाक होने के बाद पटरी पर आता कश्मीर का पर्यटन फिर से हिचकोले खाने लगा है। अक्तूबर में ताबड़तोड़ प्रवासी नागरिकांे के साथ ही एक समुदाय विशेष के लोगों की हत्याओं ने उसे जो करारा झटका दिया था उस पर अब कोरोा का नया स्वरूप भारी साबित होने लगा है।

चिंता की साफ लकीरें, हाउसबोट मालिक रिजवान के चेहरे पर देखी जा सकती थीं जो अपने हाउसबोट को उन पर्यटकों के लिए सजा रहा था जो उसके साथ अग्रिम बुकिंग कर चुके थे। दिन में कई बार हालात के बारे में जानने की खातिर उसके ग्राहकों के आने वाले फोन काल ही उसकी चिंता का कारण हैं।

हालांकि आतंकी हमलों को तो वह रूटीन का बता अपने ग्राहकों को सतुंष्ट करने की कोशिश करता था पर कोरोना के बढ़ते मामलों और कोरोना के नए स्वरूप के प्रभाव को लेकर वह उन्हे कोई जवाब नहीं दे पाता था। दरअसल कश्मीर में कोरोना के नए मामले फिर से नया रिकार्ड कायम करने लगे थे।

ऐसा ही हाल गुलमर्ग में बर्फ पर स्लेज से पर्यटकों को आनंद देने वाले तथा घोड़े वाले फिर से अपनी रोजी रोटी पर काले साए की तरह आ रहे कोरोना के नए स्वरूप से भयभीत होने लगे थे। गुलमर्ग में तीन घोड़ों का मालिक अब्दुल रज्जाक कहता था कि जब आतंकियों ने श्रीनगर में क्रमवार कई मासूमों का खून बहाया तो कश्मीर आने वाले पर्यटक गुलमर्ग तथा पहलगाम की ओर दौड़ पड़े थे। पर अब उन्हें चिंता इस बात की भी है कि कहीं कोरोना का नया स्वरूप भी इन इलाकों की दौड़ न लगा ले।

यूं तो कश्मीर में आतंकवाद 33 सालों से फैला है पर पर्यटकों के कदमों को आतंकी खतरा उतनी हद तक कभी नहीं रोक पाया जितना कोरोना के खतरे ने रोका है। दो सालों के बाद पटरी पर आते पर्यटन को कश्मीरी फिर से ढलान की ओर जाते देख चिंतित हो उठे हैं। हालांकि कुछेक पर्यटकों ने अपनी बुकिंगें भी कोरोना की नई लहर के चलते रद्द करवाई हैं पर इसकी पुष्टि आधिकारिक तौर पर नहीं हो पाई थी।

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